भवानीपुर के ऐतिहासिक ‘मित्र इंस्टीट्यूशन’ (Mitra Institution) में ‘भारत केसरी’ डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी समारोह में राज्य के मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक सुवेंदु अधिकारी ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने स्कूल की विरासत की रक्षा करने और राज्य की शिक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण को लेकर कई बड़े कदमों की घोषणा की। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कार्यक्रम के मंच से घोषणा की कि अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य के स्कूल स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के पाठ्यक्रम में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के गौरवशाली इतिहास को शामिल किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के गठन में भूमिका: राज्य के निर्माण में उनका ऐतिहासिक योगदान और राष्ट्रप्रेम। औद्योगिक व शैक्षिक योगदान: स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप में देश के औद्योगिकीकरण में उनका योगदान और कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति व शिक्षाविद् के रूप में शिक्षा का प्रसार। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह इतिहास केवल किताबों में छपना ही नहीं चाहिए, बल्कि इस पर नियमित चर्चा और शोध भी होना चाहिए। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी साल 1906 से 1917 तक मित्र इंस्टीट्यूशन के छात्र रहे थे और बाद में 1924 से 1938 तक इसके प्रबंधन बोर्ड से भी जुड़े रहे। इस ऐतिहासिक संस्थान के बुनियादी ढांचे के विकास और रेनोवेशन (Renovation) के लिए मुख्यमंत्री ने निम्नलिखित घोषणाएं कीं:

विधायक कोष से 25 लाख रुपये: भवानीपुर के विधायक के रूप में सुवेंदु अधिकारी ने अपने क्षेत्र विकास कोष (MLA Fund) से स्कूल की मरम्मत के लिए तुरंत 25 लाख रुपये देने का ऐलान किया। कोलकाता नगर निगम के कमिश्नर को आगामी अगस्त महीने के भीतर इंजीनियर भेजकर इस काम का ब्लूप्रिंट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। पीएम श्री’ और केंद्रीय योजनाओं में समावेश: स्कूल की मूल वास्तुकला को बदले बिना इसके आधुनिकीकरण के लिए शिक्षा मंत्री को निर्देश दिए गए हैं, ताकि इस स्कूल को केंद्र सरकार की ‘पीएम श्री’ (PM SHRI) योजना के तहत लाया जा सके। इसके साथ ही, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को इसे अटल बिहारी वाजपेयी के नाम वाली केंद्रीय योजना से जोड़ने का भी निर्देश दिया गया। सूचना एवं संस्कृति विभाग की पहल: मुख्यमंत्री के अधीन आने वाले सूचना एवं संस्कृति विभाग द्वारा इस वर्ष श्यामाप्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रतिमा के निर्माण सहित विभिन्न स्मारकों के लिए 200 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस कोष से भी मित्र इंस्टीट्यूशन के कल्याण के लिए विशेष प्रावधान तलाशने को कहा है। मुख्यमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि श्यामाप्रसाद मुखर्जी से लेकर स्वामी विवेकानंद तक, सभी की आराध्य देवी ‘भारत माता’ थीं। नई पीढ़ी में इसी राष्ट्रवाद की भावना को जगाने के लिए उन्होंने स्कूल के 1,000 छात्र-छात्राओं को भगिनी निवेदिता द्वारा लिखित प्रसिद्ध अंग्रेजी पुस्तक ‘द मास्टर एज़ आई सॉ हिम’ (The Master as I Saw Him) उपहार स्वरूप देने की घोषणा की। “आज की पीढ़ी के लिए श्यामाप्रसाद मुखर्जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि वे अपने दिल में एक ही मंत्र को धारण करें— नेशन फर्स्ट, नेशन फर्स्ट, नेशन फर्स्ट (सबसे पहले देश)।” सुवेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री

By UJAGAR

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