पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगी बगावत की आग अब बुझने का नाम नहीं ले रही है। लोकसभा संसदीय दल में हुए भारी विस्फोट के बाद, अब राज्यसभा में भी टीएमसी का किला ताश के पत्तों की तरह ढहने लगा है। अभी दो दिन पहले ही सोमवार को पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया था, और अब बुधवार को टीएमसी की एक और हाई-प्रोफाइल राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव (Sushmita Dev) ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सुष्मिता देव ने न केवल राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के सभी सांगठनिक पदों और प्राथमिक सदस्यता से भी अपना इस्तीफा नेतृत्व को सौंप दिया है। उनके इस फैसले के साथ ही राज्यसभा में टीएमसी की सदस्य संख्या घटकर अब महज 11 रह गई है। सोमवार को इस्तीफा देते समय सुखेंदु शेखर रॉय ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि “यह तो बस शुरुआत है, अभी कई और सांसद कतार में हैं।” उनकी यह भविष्यवाणी 48 घंटे के भीतर सच साबित हो गई। राजनीतिक गलियारों और देश की राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारों से जो छनकर खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक इस हफ्ते या अगले हफ्ते के भीतर टीएमसी के दो और राज्यसभा सांसद अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं। सुष्मिता देव कांग्रेस के दिवंगत और कद्दावर नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं। वे असम के सिलचर से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। साल 2019 के चुनाव में हार के बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया था और 2021 में ममता बनर्जी की मौजूदगी में टीएमसी में शामिल हो गई थीं। टीएमसी में आते ही वे तेजी से शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा बन गईं। पार्टी ने उन्हें अपना राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया और फिर पश्चिम बंगाल के कोटे से राज्यसभा भेज दिया। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने सुष्मिता देव को पार्टी में मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी भारत (North-East India) में टीएमसी के विस्तार के लिए शामिल किया था। उन्हें त्रिपुरा और असम में पार्टी संगठन को खड़ा करने की बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, राजनीतिक रूप से इन दोनों राज्यों में टीएमसी अपना खाता तक नहीं खोल सकी और उसका कोई वजूद नहीं बन पाया। उल्टा, पश्चिम बंगाल के बाहर की नेता होने के बावजूद सुष्मिता देव को बंगाल के कोटे से राज्यसभा का टिकट दिए जाने पर टीएमसी के बंगाल के स्थानीय नेताओं और अंदरूनी हलकों में भारी असंतोष था। अब जैसे ही पार्टी पर संकट आया, सुष्मिता ने सबसे पहले किनारा कर लिया। सोमवार रात को दिल्ली में यह अफवाह उड़ी थी कि टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसद बीजेपी के एक बेहद कद्दावर केंद्रीय नेता से मिलने पहुँचे थे। हालांकि, उस बैठक में सुष्मिता थीं या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन, सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा बेहद गर्म है कि सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से अलग से मुलाकात की है। ऐसे में वे अब ‘जोड़ाफूल’ (TMC) को छोड़कर ‘कमल’ (BJP) का दामन थामेंगी या वापस अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में घर वापसी करेंगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, ममता बनर्जी पूरी तरह से बैकफुट पर आ गई हैं।

By UJAGAR

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