पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहां पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनका परिवार ‘अवैध निर्माण’ के आरोपों को लेकर कानूनी पेचीदगियों का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अब पार्टी के मुख्य दफ्तर (पार्टी कार्यालय) को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ईएम बाईपास (EM Bypass) से सटे मेट्रोपॉलिटन इलाके में किराए पर लिए गए टीएमसी के कॉर्पोरेट स्टाइल दफ्तर का एग्रीमेंट खत्म होने के बावजूद उसे खाली नहीं करने का आरोप लगा है। स्थिति यह है कि मकान मालिक मंटू साहा और उनके बेटे अमित साहा खुद अपने घर के दरवाजे (‘दुआरे’) पहुंचे, लेकिन उन्हें वहां कोई नहीं मिला। मूल रूप से व्यवसायी मंटू साहा ने राज्य में हुए राजनीतिक उलटफेर (सत्ता परिवर्तन) के तुरंत बाद ही टीएमसी से अपना घर खाली करने को कहा था और इसके लिए बकायदा 2 महीने का समय भी दिया था। लेकिन समय बीत जाने के बाद भी किसी ने घर खाली करने की सुध नहीं ली। यहां तक कि मकान मालिक का फोन भी अब कोई नहीं उठा रहा है। परेशान होकर रविवार सुबह मंटू साहा और उनके बेटे अमित साहा खुद उस घर पर पहुंचे, लेकिन वहां ताला लटका मिला और कोई मौजूद नहीं था। काफी देर इंतजार करने के बाद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। ‘संवाद प्रतिदिन डिजिटल’ से बात करते हुए मकान मालिक के बेटे अमित साहा ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा, “साल 2019 में हमने वहां होटल बनाने के उद्देश्य से बिल्डिंग तैयार की थी। लेकिन बाद में टीएमसी की ओर से इसे किराए पर ले लिया गया। शुरुआत में केवल डेढ़ साल का एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने और समय मांग लिया। आखिरकार साल 2025 में यह रेंट एग्रीमेंट पूरी तरह खत्म हो चुका है। अब जब हम अपना घर वापस मांग रहे हैं, तो कोई हमारा फोन तक नहीं उठा रहा है। मैं हाथ जोड़कर विनती करता हूँ, कृपया हमारी प्रॉपर्टी हमें जल्द से जल्द वापस कर दीजिए।” अमित साहा ने यह भी साफ किया कि उनकी इस मांग के पीछे कोई राजनीति नहीं है। हालांकि, राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालातों को देखते हुए उन्हें डर है कि कहीं उनके खाली पड़े इस आलीशान मकान पर कोई हमला न हो जाए या प्रॉपर्टी को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सीधे तरीके से बात नहीं बनी, तो वे जल्द ही कानूनी रास्ता अपनाएंगे। गौरतलब है कि सत्ता में आने से पहले ईएम बाईपास के किनारे स्थित एक पुराना घर ही ममता बनर्जी की पार्टी का मुख्य कार्यालय हुआ करता था, जहां पार्टी के शीर्ष नेताओं का आना-जाना लगा रहता था। लेकिन कुछ साल पहले पार्टी ने तय किया कि पुराने ढर्रे के बजाय दफ्तर को बिल्कुल कॉर्पोरेट लुक दिया जाएगा। इसी वजह से मंटू साहा की इस नई बिल्डिंग को किराए पर लिया गया था।लेकिन अब राज्य में ‘तृणमूल-युग’ समाप्त हो चुका है। सत्ता से बाहर होते ही विपक्षी दल टीएमसी के अंदर भी बिखराव की स्थिति है। पार्टी के कई ब्लॉक और धड़े कालीघाट (ममता बनर्जी के आवास) की चिंता बढ़ा रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सोमवार यानी 8 जून को दिल्ली में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पहले ही दिल्ली रवाना हो चुके हैं। सूत्रों का तो यह भी दावा है कि लोकसभा में भी टीएमसी सांसदों के बीच बड़ी टूट होने की संभावना है। ऐसे राजनीतिक संकट के बीच, क्या टीएमसी नेतृत्व मंटू साहा के घर के इस कानूनी और प्रशासनिक विवाद को सुलझा पाएगा, इस पर फिलहाल संशय बना हुआ है।

By UJAGAR

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