भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा में तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों पर हमले की घटना सामने आने के बाद त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले में तनाव का माहौल है। बॉक्सानगर के आशाबाड़ी सीमा चौकी के पास तस्करी रोकने के दौरान जवानों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि भीड़ ने सुरक्षा बल के जवानों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस घटना में तीन BSF जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वहीं, पुलिस ने मामले में अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक, सोमवार को 49वीं बटालियन के BSF जवानों को भारत-बांग्लादेश सीमा के पास कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर अवैध सामान की तस्करी किए जाने की सूचना मिली थी। जवानों ने मौके पर पहुंचकर तस्करी की कोशिश को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान कुछ संदिग्ध भारतीय और बांग्लादेशी तस्कर वहां से भागने लगे। BSF ने एक भारतीय संदिग्ध को पकड़ लिया, जबकि सीमा के दूसरी ओर मौजूद अन्य लोग भागने में सफल रहे। आरोप है कि पकड़े गए व्यक्ति ने गांव पहुंचकर BSF जवानों पर मारपीट करने का आरोप लगाया। इसके बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। देखते ही देखते मामला उग्र हो गया और लोगों ने बॉक्सानगर-रहीमपुर सड़क पर विरोध प्रदर्शन करते हुए रास्ता रोक दिया। इसी दौरान मौके पर पहुंचे BSF के अधिकारियों और जवानों को भीड़ ने घेर लिया। आरोप है कि हमलावरों ने लाठी और बांस के डंडों से जवानों पर हमला किया। इस दौरान कंपनी कमांडर सहित तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हमले के दौरान कुछ लोगों पर BSF जवानों की सर्विस राइफल छीनने की कोशिश करने का भी आरोप है। इसके अलावा सुरक्षा बल के वाहन को भी निशाना बनाया गया और उसमें तोड़फोड़ की गई। घटनास्थल के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक छीना गया हथियार बाद में बरामद कर लिया गया। घटना की सूचना मिलते ही त्रिपुरा पुलिस और BSF के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की। सिपाहीजला जिले के पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, इस मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस अन्य संदिग्धों की पहचान कर उनकी तलाश कर रही है। BSF जवानों पर हुए हमले की त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ इस तरह की हिंसा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आरोपियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। घटना के बाद आशाबाड़ी और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और BSF की ओर से संयुक्त रूप से निगरानी की जा रही है। जांच एजेंसियां हमले के पीछे की परिस्थितियों और कथित तस्करी नेटवर्क की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। भारत-बांग्लादेश सीमा पर हुई यह घटना एक बार फिर सीमा सुरक्षा और तस्करी पर नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब प्रशासन की प्राथमिकता आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
