ईरान ने बताया है कि उसने कतर, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं। ईरानी सेना के मुताबिक, हमलों में कुवैत के पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, कतर के अर्ली वॉर्निंग सैटेलाइट एंटीना और बहरीन में अमेरिकी सेना के फ्यूल टैंक को निशाना बनाया गया। इन हमलों के लिए बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। इससे पहले अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरे दिन बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इन हमलों से ईरान के अहवाज में 3 लोगों की मौत हुई है। ईरानी सेना ने कहा कि वह अमेरिकी हमलों का जवाब देती रहेगी। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान समझौता चाहता है, लेकिन उसे इस बात पर भरोसा नहीं कि तेहरान समझौते का पालन करेगा। अमेरिका ने बुधवार देर रात ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। हमलों में बुशहर, चाबहार, बंदर अब्बास, सीरिक और कोनारक समेत कई शहरों को निशाना बनाया गया। हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में ईरान की सैन्य क्षमता और रणनीतिक गतिविधियों को कमजोर करना है। अमेरिकी सेना ने कहा कि अभियान के तहत कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। एयरस्ट्राइक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान भविष्य में अमेरिका पर हमला करता है तो उसे 20 गुना अधिक ताकत से जवाब दिया जाएगा। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उन्हें इस बात का भरोसा नहीं है कि तेहरान किसी भी समझौते का पालन करेगा। NATO शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ हुआ सीजफायर समझौता (MoU) अब समाप्त हो चुका है और अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ किसी नए समझौते की दिशा में आगे नहीं बढ़ना चाहता। ईरान के विदेश मंत्री  ने अमेरिका के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धमकियों और सैन्य दबाव के माहौल में अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले अमेरिका को पुराने समझौतों का सम्मान करना होगा, तभी आगे किसी वार्ता पर विचार किया जा सकता है।

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