पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के श्रीरामपुर स्थित माहेश में गुरुवार को ऐतिहासिक रथयात्रा उत्साह और श्रद्धा के साथ शुरू हुई। सुबह से ही जगन्नाथ मंदिर में हजारों श्रद्धालु पहुंचने लगे। राज्य के अलग-अलग जिलों से आए भक्तों ने भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर पूरे दिन भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। देश की सबसे प्राचीन रथयात्राओं में शामिल माहेश रथयात्रा इस वर्ष अपने 630वें वर्ष में पहुंच गई है। रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा को मंदिर से बाहर लाकर पारंपरिक विधि-विधान के साथ रथ पर विराजमान किया जाता है, जहां से उनकी मौसीबाड़ी की यात्रा शुरू होती है। इस परंपरा को देखने के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। माहेश का विशाल लोहे का रथ श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। करीब 140 वर्ष पहले मार्टिन बर्न कंपनी द्वारा तैयार किए गए इस रथ की ऊंचाई लगभग 50 फीट है और इसमें 12 विशाल पहिए लगे हैं। नौ शिखरों वाले इस रथ की देखरेख आज भी कोलकाता के श्यामबाजार स्थित बसु परिवार द्वारा की जाती है। रथयात्रा के अवसर पर मंदिर परिसर और स्नानपीढ़ी मैदान में विशाल मेले का आयोजन किया गया। भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक माहौल का अनुभव कराया। बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों के लिए महाप्रसाद वितरण की भी विशेष व्यवस्था की गई। इस वर्ष पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की प्रमुख रथयात्रा समितियों को पहली बार पांच-पांच लाख रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया। माहेश जगन्नाथ मंदिर को भी यह सहायता मिली, जिसके बाद पूरे मंदिर परिसर और रथ को आकर्षक ढंग से सजाया गया। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए भी व्यापक इंतजाम किए।

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