ओडिशा के श्रीक्षेत्र पुरी में आयोजित विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा (Rath Yatra 2026) के पावन उत्सव के बीच एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन के लिए उमड़े देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के हुजूम के बीच अचानक मची भगदड़ (Stampede) के कारण कम से कम 120 श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल और अस्वस्थ हो गए हैं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक एक श्रद्धालु की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। गुरुवार सुबह से ही मंदिर परिसर और ग्रैंड रोड (बड़ा डांड) पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा था। हादसा उस वक्त हुआ जब भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को उनके रथों पर ले जाने की पारंपरिक ‘पहांडी’ (Pahandi) रस्म चल रही थी। इसी दौरान प्रभु की एक झलक पाने की होड़ में श्रद्धालुओं के बीच अचानक धक्का-मुक्की और भारी हुड़दंग शुरू हो गया। एक तरफ जहां भीड़ का भारी दबाव था, वहीं दूसरी ओर उमस और भीषण गर्मी के कारण स्थिति और बदतर हो गई। भीड़ में फंसे सैकड़ों लोगों का दम घुटने लगा और वे बेहोश होकर गिरने लगे। रथयात्रा को लेकर ओडिशा प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। मंदिर के आसपास हजारों पुलिसकर्मी, आपदा प्रबंधन बल (ODRAF/NDRF), अग्निशमन विभाग और डॉक्टरों की विशेष टीमें पहले से तैनात थीं।इस हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया है। पुरी पुलिस लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से माइकिंग कर श्रद्धालुओं से केवल निर्धारित रास्तों का उपयोग करने और सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों का पालन करने की अपील कर रही है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को दोबारा टला जा सके। ओडिशा स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार:
- अस्पताल में भर्ती कराए गए अधिकांश लोग सांस लेने में तकलीफ (Suffocation), डीहाइड्रेशन (Dehydration) और भीड़ के दबाव में दबने के कारण अस्वस्थ हुए हैं।
- अस्वस्थ और घायल श्रद्धालुओं को तुरंत प्राथमिक चिकित्सा के बाद एम्बुलेंस के जरिए पुरी जिला अस्पताल और आसपास के अन्य चिकित्सा केंद्रों में भेजा गया।
- कई लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि गंभीर रूप से प्रभावित लोगों को डॉक्टरों की सघन निगरानी (Observation) में रखा गया है।
मुस्तैद थी पुलिस, वरना हो सकता था और बड़ा हादसा: पुलिस और आपातकालीन सेवाओं ने तत्परता दिखाते हुए घटना के तुरंत बाद मोर्चा संभाला। प्रशासन द्वारा पहले से ही तैयार रखे गए आपात
