प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पोस्ट किए गए अभद्र, अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर कड़ा एक्शन शुरू कर दिया है।दिल्ली पुलिस की स्पेशल सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल ने ऐसे विवादित वीडियो, पोस्ट और तस्वीरों को चिन्हित कर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि) को औपचारिक नोटिस भेजे हैं। पुलिस के निर्देश के बाद अब तक अधिकांश आपत्तिजनक सामग्री को इंटरनेट से हटा दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक विशेष टीम 24 घंटे सोशल मीडिया पर पोस्ट की जा रही सामग्री की समीक्षा कर रही है। “प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के खिलाफ अभद्र भाषा और आपत्तिजनक टिप्पणियों वाले कई वीडियो और पोस्ट सामने आए थे। प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने को कहा गया है। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और नए मामलों पर कार्रवाई की जाएगी।” केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आंदोलन समाप्ति की घोषणा की।CJP ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के अलावा अपनी मांगों की सूची में कुछ नई शर्तें भी जोड़ी थीं, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार करने का आश्वासन दिया गया है:
- मुआवजा: आत्महत्या करने वाले पीड़ित नीट परीक्षार्थियों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
- FIR वापसी: आंदोलन के दौरान देश भर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और आयोजकों पर दर्ज की गई सभी FIR वापस ली जाएंगी और भविष्य में कोई नई कार्रवाई नहीं होगी।
- सद्भावना समझौता: CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि संगठन ने हमेशा शांतिपूर्ण विरोध का समर्थन किया है और सरकार के साथ बातचीत के बाद ही 37 दिनों का यह आंदोलन वापस लिया गया है।
मई में नीट-यूजी परीक्षा के नतीजों के बाद उपजे विवाद के बाद जून में गठित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने 20 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। इस आंदोलन को उस वक्त बड़ी ताकत मिली जब 28 जून को प्रसिद्ध समाजसेवी सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में अनशन पर बैठ गए थे।20 जुलाई को CJP के ‘संसद मार्च’ के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की घटना के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। हालांकि, अब सरकार द्वारा मांगें माने जाने और धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद देशव्यापी छात्र प्रदर्शन थम गया है।
