मालदा में ज्यूडिशियल अधिकारियों की घेराबंदी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा दखल दिया है। चुनाव आयोग सात अधिकारियों की घेराबंदी की CBI या NIA जांच की मांग कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को अपने हिसाब से CBI या NIA जांच की मांग करने की इजाजत दे दी है। इसके साथ ही, चीफ जस्टिस की बेंच ने आज यह भी टिप्पणी की कि मालदा की घटना में पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मालदा की घटना में जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और राज्य के मुख्य सचिव और राज्य के पुलिस महानिदेशक को तलब किया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि यह ज्यूडिशियल अधिकारियों का मनोबल तोड़ने और चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने की एक सोची-समझी और सोची-समझी चाल लगती है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह किसी को भी ज्यूडिशियल अधिकारियों को मानसिक आघात पहुंचाने के लिए दखल देने या कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं देगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा है कि यह घटना न केवल ज्यूडिशियल अधिकारियों को डराने की एक बेशर्म कोशिश है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को भी चुनौती है। साथ ही, आज की सुनवाई में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि मालदा जिले में तीन महिलाओं समेत सात ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को रात भर घेरे में रखने की घटना बहुत निंदनीय है। सुप्रीम कोर्ट ने वहां हुए विरोध प्रदर्शनों को बहुत गंभीरता से लिया है, जहां SIR के काम में लगे ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को घेरे में रखा गया था।
