बंगाल की डबल इंजन सरकार ने अपने पहले पूर्ण बजट में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण पर विशेष जोर दिया है। बजट में पहली बार राज्य में शक्तिपीठ सर्किट विकसित करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही हेरिटेज आयोग के पुनर्गठन तथा विभिन्न ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के पुनरुद्धार की व्यापक योजना भी सामने रखी गई है। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने बजट भाषण में कहा कि राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों और मंदिरों को पर्यटन सर्किट के माध्यम से आपस में जोड़ा जाएगा। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था व रोजगार के अवसरों को भी मजबूत करना है। प्रस्तावित शक्तिपीठ सर्किट में भ्रामरी देवी, नंदीकेश्वरी, तारापीठ, बक्रेश्वर, फुल्लरा और कंकालीतला जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों को शामिल किया जाएगा। इन स्थलों को जोड़कर एक समग्र पर्यटन कार्यक्रम तैयार किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। बजट में श्रीश्री चैतन्य महाप्रभु तीर्थयात्रा सर्किट विकसित करने की भी घोषणा की गई है। इसके तहत चैतन्य महाप्रभु से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को एक विशेष तीर्थ मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार ने कालीघाट, तारापीठ, जोड़ासांको सहित राज्य के विभिन्न शक्तिपीठों और अन्य विरासत स्थलों के संरक्षण एवं पुनरुद्धार की योजना बनाई है। इसके लिए हेरिटेज आयोग का पुनर्गठन किया जाएगा, जो इन परियोजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि बंगाल अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। इन धरोहरों का संरक्षण और उनका व्यापक प्रचार-प्रसार समय की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढिय़ां भी इन विरासतों से परिचित हो सकें। मुख्यमंत्री शुभेदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हेरिटेज आयोग को पुनर्जीवित करने तथा मठ-मंदिरों के संरक्षण के लिए 3000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। संस्कृति और परंपरा को किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार राज्य की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान देने के लिए व्यापक स्तर पर काम करेगी। यह पहल केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी मददगार साबित होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *