विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता से बाहर हुई तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे घमासान ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी की अनुशासन समिति ने संगठन विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में एक साथ कई वरिष्ठ नेताओं को शोकॉज नोटिस जारी किया है। इस कार्रवाई के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और पार्टी के भीतर जारी शक्ति संघर्ष सार्वजनिक रूप से सामने आ गया है। जिन नेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है, उनमें कोलकाता के मेयर और तृणमूल के प्रमुख चेहरों में शामिल फिरहाद हाकिम (बॉबी), पूर्व मंत्री अरोप विश्वास, विधायक अरोप राय, जावेद खान, रथीन घोष, बिप्लब मित्र, स्नेहाशीष चक्रवर्ती और सबीना यासमीन शामिल हैं। पार्टी ने इन नेताओं से आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा है। तृणमूल की अनुशासन समिति के मुताबिक, इन नेताओं पर पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने, संगठनात्मक फैसलों को चुनौती देने और आंतरिक गुटबाजी को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं। समिति का मानना है कि इन गतिविधियों से पार्टी की छवि और संगठनात्मक एकता को नुकसान पहुंचा है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में न्यूटाउन के एक होटल में आयोजित बागी खेमे की विशेष बैठक को माना जा रहा है। बैठक में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की नई नेशनल वर्किंग कमेटी (NWC) के गठन का दावा किया गया। इतना ही नहीं, बैठक में ममता बनर्जी की जगह अरोप राय को संगठन का नया चेयरमैन घोषित किए जाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। बैठक के बाद घोषित नई संगठनात्मक संरचना में अरोप राय को चेयरमैन बनाया गया, जबकि फिरहाद हाकिम, अरोप विश्वास, रथीन घोष और सबीना यासमीन को सह-अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। वहीं ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव तथा अखरुज्जमान अंसारी को कोषाध्यक्ष बनाया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक साथ इतने बड़े नेताओं को शोकॉज नोटिस भेजा जाना तृणमूल कांग्रेस के इतिहास की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों में से एक माना जा सकता है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर टकराव गहरा चुका है। आने वाले दिनों में इन नेताओं के जवाब और पार्टी की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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