पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने राज्य की आपदा प्रबंधन तैयारियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए NDRF की तर्ज पर 200 सदस्यीय रिजर्व फोर्स तैयार कर रही है। यह फोर्स विशेष रूप से चक्रवात और अन्य आपदाओं के दौरान त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में अहम भूमिका निभाएगी। दिलीप घोष ने कहा कि पिछली सरकार के 15 वर्षों के कार्यकाल में राज्य के पास NDRF जैसी कोई विशेष टीम नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल चक्रवात आने के बावजूद राहत और बचाव कार्यों के लिए ओडिशा से टीम बुलानी पड़ती थी। सड़कें भी तभी साफ हो पाती थीं, जब पड़ोसी राज्य से सहायता मिलती थी। उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य में आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए 200 प्रशिक्षित कर्मियों की रिजर्व फोर्स बनाई जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित रिजर्व फोर्स की तैनाती सुंदरबन, कोलकाता और राज्य के तटीय क्षेत्रों में की जाएगी। इन इलाकों में हर साल चक्रवात और भारी बारिश का खतरा बना रहता है। सरकार का उद्देश्य आपदा के समय राहत कार्यों में तेजी लाना और जनहानि को कम करना है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए लगातार आवश्यक कदम उठा रही है। 24 जून को कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम ढहने की घटना पर तृणमूल कांग्रेस विधायक फिरहाद हकीम के बयान को लेकर पूछे गए सवाल पर दिलीप घोष ने कहा कि उनकी किसी भी राजनीतिक विवाद में कोई रुचि नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर दुर्घटना है और इसकी निष्पक्ष जांच होगी। जो भी व्यक्ति या संस्था इस हादसे के लिए जिम्मेदार पाई जाएगी, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिलीप घोष ने कहा कि राज्य सरकार का पूरा फोकस आपदा प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई रिजर्व फोर्स के गठन से भविष्य में चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्य पहले की तुलना में अधिक तेज और व्यवस्थित तरीके से किए जा सकेंगे।

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