28 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस पार्टी में बगावत और टूट के बाद अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद डोला सेन ने पार्टी के बागी खेमे (विधायकों/नेताओं) के खिलाफ कोलकाता के प्रगति मैदान पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत (FIR) दर्ज कराई है। उन्होंने बागी नेताओं पर मुख्य रूप से पार्टी के नाम, आधिकारिक लोगो और चुनाव चिन्ह का अवैध व अनधिकृत उपयोग करने का आरोप लगाया है। डोला सेन ने कोलकाता के प्रगति मैदान थाने में चार पेज की शिकायत दी है। इसमें उन्होंने कहा है कि बागी गुट खुद को ही ‘असली टीएमसी’ और पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बताकर लोगों और कार्यकर्ताओं को गुमराह कर रहा है। ममता बनर्जी ने 1 जनवरी, 1998 को तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। डोला सेन ने बागी नेताओं पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और खुद को पार्टी के पदों पर पेश करके धोखाधड़ी करने का आरोप है। ममता बनर्जी की करीबी नेता ने शिकायत के अनुसार, यह गुट अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम पर फर्जी इलेक्ट्रॉनिक संचार, झूठे संदेश और अवैध दस्तावेज प्रसारित कर रहा है। डोला सेन ने लिखित शिकायत में कहा है कि बागी खेमे ने पार्टी नेतृत्व की अनुमति के बिना अवैध रूप से बैठकें बुलाईं और एक ‘स्वघोषित राष्ट्रीय कार्यसमिति’ का गठन कर लिया, जो कि पूरी तरह से गैरकानूनी है। ट्रेड यूनियन नेता रहीं डोला सेना पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की सांसद हैं। वह नंदीग्राम और सिंगुर आंदोलन के वक्त ममता बनर्जी के साथ आई थीं। पश्चिम बंगाल में 58 विधायकों के हस्ताक्षर के बाद ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा में नेता विपक्ष बने हैं। उन्होंने अपनी नेतृत्व वाले बागी गुट ने खुद को असली टीएमसी बताते हुए एक अलग राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा की है। इसके जवाब में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक खेमे ने न केवल पुलिस में यह शिकायत दर्ज कराई, बल्कि चुनाव आयोग (ECI) को भी अपनी पुनर्गठित आधिकारिक कमेटी की सूची सौंप दी है। ऋतब्रज बनर्जी की अगुवाई वाले खेमे ने अरूप रॉय को नया टीएमसी अध्यक्ष बनाया है।

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