पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस बढ़ाते हुए दुर्गा सुरक्षा दस्ता लांच किया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को राज्य के सभी थानों में साइबर अपराधों से निपटने के लिए साइबर सहायता डेस्क का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध एक महामारी बन गया है और इससे निपटने के लिए सभी थानों में सहायता डेस्क की स्थापना की गई है। मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के सभी ज़िलों और पुलिस आयुक्तालयों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘दुर्गा सुरक्षा दस्ते’ का भी उद्घाटन किया। राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में आयोजित एक कार्यक्रम में शुभेंदु अधिकारी ने कहा हमारी सरकार के मुख्य लक्ष्यों में से एक महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले में हमारी ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। शुभेंदु अधिकारी 9 मई को पश्चिम बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने थे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने का वादा किया था। पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं के लिए बनाए गए दुर्गा सुरक्षा दस्ते की ड्रेस पिंक रखी है। इसमें चयन पाने वाली महिला पुलिसकर्मियों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है। ये महिला पुलिसकर्मी बुलेट पर सवार होकर राउंड द क्लॉक जरूरत के हिसाब से गश्त करेंगी। वे स्कूलों और मंदिराें के साथ दूसरे भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर फोकस करेंगी, ताकि महिलाओं से खुलेआम छेड़खानी जैसी घटनाओं को रोका जा सके। पश्चिम बंगाल में कुल 23 जिले हैं। इन जिलों को बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के लिए पांच प्रभागों में बांटा गया है। इनमें प्रेसिडेंसी, बर्धमान, मेदिनीपुर, मालदा और जलपाईगुड़ी शामिल हैं।
बंगाल के दुर्गा दस्ते की बड़ी बातें:
महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह दस्ता सीमावर्ती इलाकों और अन्य क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को सख्त करने में भी सहयोग करेगा।
दुर्गा दस्ता (दुर्गा सुरक्षा दस्ता) पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित एक विशेष पुलिस बल (बटालियन) है।
यह पूरी तरह से महिलाओं के लिए और महिला पुलिसकर्मियों द्वारा संचालित एक विशेष दस्ता है।
इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में महिलाओं को चौबीसों घंटे (24/7) सुरक्षित माहौल प्रदान करना है।
दुर्गा दस्ता के तहत राज्य के हर पुलिस थाने में एक समर्पित महिला हेल्प डेस्क बनाई जाएगी ताकि महिलाएं बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
