केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता के न्यू टाउन इको पार्क में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उनकी 125 फीट ऊंची प्रतिमा परियोजना के शिलान्यास समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रतिमा का शिलान्यास नहीं, बल्कि ‘सोनार बांग्ला’ के निर्माण का भूमि पूजन है। अमित शाह ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निधन के कई दशक बाद आज बंगाल में उनकी प्रतिमा का शिलान्यास हो रहा है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि बंगाल के पुनर्निर्माण की शुरुआत उनकी 125वीं जयंती से हो रही है। गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बंगाल के इस महान सपूत के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि झील के किनारे बनने वाली 125 फीट ऊंची प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। अमित शाह ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि प्रतिमा परिसर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाए, जहां भारत की सुरक्षा और रणनीतिक विषयों पर शोध किया जा सके। शाह ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ‘एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे’ का नारा दिया था और कश्मीर के मुद्दे पर संघर्ष करते हुए अपना बलिदान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी संदिग्ध मृत्यु की कांग्रेस सरकार ने कभी जांच नहीं कराई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर उनके सपने को साकार किया। गृह मंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में रहने वाले हिंदुओं की चिंता की थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने CAA लागू कर पीड़ित हिंदुओं को नागरिकता देने का संकल्प पूरा किया है और देश से अवैध घुसपैठियों को बाहर करने की कार्रवाई जारी रहेगी। अमित शाह ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष का एक साथ आना ऐतिहासिक संयोग है। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदे मातरम्’ के माध्यम से भारतीय राष्ट्रवाद का बीजारोपण किया था। अपने संबोधन के अंत में अमित शाह ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को फोन कर अनुरोध किया था कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर राज्य में अवकाश घोषित किया जाए।
