नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन महीने के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं। BHU पर वाराणसी परिसर में अवैध रूप से 33 पेड़ काटने का आरोप है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) को निर्देश दिया है कि वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से 2.65 करोड़ रुपये से अधिक का पर्यावरण मुआवजा वसूलने की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करे। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में तय समयसीमा के अंदर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। यह कार्रवाई NGT द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है। रिपोर्ट में BHU को वाराणसी स्थित अपने परिसर में बिना अनुमति 33 पेड़ों की कटाई का दोषी पाया गया है। समिति ने इसे पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन माना है। विश्वविद्यालय की ओर से पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए 978 पौधे लगाए जाने का दावा किया गया है। BHU ने वृक्षारोपण अभियान शुरू कर क्षतिपूर्ति का प्रयास किया, लेकिन ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि इससे पर्यावरण मुआवजे की कानूनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। NGT ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह निर्धारित समयसीमा के भीतर पर्यावरण मुआवजे का आकलन कर राशि की वसूली की प्रक्रिया पूरी करे। ट्रिब्यूनल ने मामले में प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर सख्ती का स्पष्ट संकेत है। इससे सरकारी और निजी संस्थानों को भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन करने का संदेश मिलेगा।

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