भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को कजाखस्तान के बैकोनूर कास्मोड्रोम से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए आठ महीने के मिशन पर रवाना होंगे। मिनियापोलिस में यूक्रेनी और भारतीय मूल के माता-पिता के घर जन्मे मेनन इमरजेंसी मेडिसिन फिजिशियन और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहते हुए मेनन लंबे समय तक चलने वाली अंतरिक्ष यात्रा के शारीरिक असर का अध्ययन करने के लिए कई प्रयोग करेंगे और यह देखेंगे कि माइक्रोग्रैविटी अंतरिक्ष यात्रियों में रक्त के प्रवाह, नसों की बनावट और रक्त की संरचना को कैसे प्रभावित करती है। अमेरिकी एयर फोर्स में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम’ के तहत अफगानिस्तान में फ्रंटलाइन पर काम किया और हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के साथ भी काम किया। 49 वर्षीय मेनन ने पोलियो टीकाकरण अभियानों के अध्ययन और उनमें सहयोग के लिए रोटरी एंबेसेडोरियल स्कालर के तौर पर भारत में भी एक साल बिताया। वे कास्मोनाट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ रोस्कोस्मोस सोयुज एमएस-29 स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे। मेनन ने 2014 में नासा में फ्लाइट सर्जन के तौर पर अपना करियर शुरू किया और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहने और काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के साथ काम किया। मेनन 2018 में स्पेसएक्स से जुड़े, जहां उन्होंने कंपनी का मेडिकल प्रोग्राम शुरू किया। उन्होंने पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी में मदद की और स्टारशिप के विकास पर बारीकी से काम किया। दिसंबर 2021 में नासा के अंतरिक्ष यात्री के तौर पर उन्हें चुना गया। मेनन की पत्नी एना विल्हेम भी अंतरिक्ष यात्री हैं।

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