पाकिस्तान में नेताओं की गिरफ्तारी, उनका जेल जाना, उनका जेल से बाहर आना और फिर प्रधानमंत्री बन जाना हर कुछ एक राजनीतिक शतरंज की तरह है। इमरान खान पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आदियाला जेल से अस्पताल शिफ्ट किए गये और इलाज के बाद उन्हें फिर से जेल भेज दिया गया है। पाकिस्तान में रात भर ड्रामा चला। 6 डॉक्टरों की टीम ने कहा कि इमरान खान ठीक हैं और वो जेल में रह सकते हैं। लोग सोच रहे होंगे कि पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट काफी शक्तिशाली है। वहाँ फैसलों की तामील की जाती है। तो ऐसा कुछ नहीं है। सुप्रीम कोर्ट भी सेना के इशारे पर फैसला करता है और इमरान खान के जेल से बाहर आना और वापस जेल जाने के पीछे भी ऐसा ही कुछ कहानी है। ये पूरा एक राजनीतिक स्क्रिप्ट है और बहुत बड़े सीक्रेट डील की कहानी का हिस्सा है जिसके तहत इमरान खान इलाज के लिए विदेश तक भेजे जा सकते हैं। याद कीजिए, अभी कुछ दिन पहले ही बिलावल भुट्टो ने एक वीडियो बनाया था। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने उस वीडियो में शहबाज शरीफ सरकार और PML-N को चेतावनी दी थी। उसमें उन्होंने PoK चुनावों में धांधली की वजह को लेकर कहा था कि सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा था ‘टिक-टॉक, टिक-टॉक… आपका काउंटडाउन शुरू हो गया है।’ इंटरव्यू में पाकिस्तान के सीनियर जर्नलिस्ट हामिद मीर ने कहा कि ‘शरीफ परिवार जानता है कि पर्दे के पीछे से उन्होंने वर्षों तक कैसे डील की है और वो इसलिए परेशान हैं क्योंकि उन्हें पता है कि इमरान खान भी ऐसे ही किसी डील के तहत जेल से बाहर आए हैं।’ रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इमरान खान के एक करीबी सहयोगी ने रॉयटर्स को बताया कि अगर उन्हें रिहा किया जाता है तो वे सेना या सेना प्रमुख असीम मुनीर से टकराव नहीं करेंगे। उन्होंने मुनीर को ऐसे व्यक्ति के तौर पर पेश किया जो इस हफ्ते कानूनी मामले में हुई प्रगति के बाद ‘सुलह का हाथ’ बढ़ा सकते हैं। इमरान खान की पार्टी PTI के प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने अब तक का सबसे मजबूत संकेत दिया कि पार्टी सेना के साथ सुलह करने को तैयार है। ये पार्टी के रूख में बड़ा परिवर्तन है और इसी बात का इशारा है कि इमरान खान और असीम मुनीर के बीच कोई समझौता हो गया है। पाकिस्तानी सेना के करीबी सूत्रों ने गुरुवार को न्यूज-18 को बताया है कि एक ‘सही समझौते’ के बाद इमरान खान असल में जेल से बाहर आ चुके हैं और जल्द ही उनकी राजनीतिक वापसी हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि उनके अस्पताल जाने को लगभग जेल से बाहर आने जैसा ही माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि यह घटनाक्रम इमरान खान को राजनीतिक व्यवस्था में वापस लाने की एक बड़ी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। सूत्र ने कहा ‘यह एक पूरी प्रक्रिया है जिसमें उन्हें फिर से मुख्यधारा में लाया जाएगा और वह मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करेंगे।’ सूत्रों के मुताबिक सेना और सत्ता प्रतिष्ठान को यह एहसास हो गया है कि इमरान खान अब भी एक ‘बड़ी राजनीतिक ताकत’ बने हुए हैं। उनका मानना ​​है कि उन्हें बाहर आने और मौजूदा शासन व्यवस्था का समर्थन करने देने में कोई नुकसान नहीं है। उन्हें फिर से जेल वापस भेजा जाना भी उसी ड्रामे का हिस्सा है। ये जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा ही है। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर की रणनीति यह है कि जब पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर ध्यान दे रहा है तो सभी लोग ‘अंदरूनी तौर पर मिलकर’ काम करें। जबकि इमरान खान के करीबी सूत्रों ने कहा कि वह पाकिस्तान नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें विदेश जाना होता तो वे बहुत पहले ही चले गए होते। हालांकि पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों का कहना है कि असीम मुनीर पाकिस्तान के चार प्रातों को 12 अलग अलग हिस्सों में बांटना चाहते हैं। लेकिन ना तो शहबाज शरीफ और ना ही बिलावल भुट्टो इसके लिए तैयार हैं। खासकर बिलावल भुट्टो जिनकी पार्टी की सरकार सिंध में है उसे पता है कि अगर सिंध के तीन हिस्से किए गये तो पार्टी हमेशा के लिए ही खत्म हो जाएगी। प्रांतों के बंटवारे के लिए संसद में दो तिहाई बहुमत की जरूरत है और शहबाज शरीफ को अगर प्रधानमंत्री बने रहना है तो उन्हें प्रांतों का बंटवारा करना ही होगा। ऐसे में इमरान खान को इसलिए जेल से बाहर लाया गया है ताकि बिलावल भुट्टो अगर संसद में बिल का समर्थन नहीं करते हैं तो इमरान खान की पार्टी के सांसद बिल का समर्थन करें। शरीफ परिवार का सेना से समझौतों का लंबा इतिहास रहा है। शहबाज जानते हैं कि इमरान खान के जरिए असीम मुनीर अब उन पर दबाव बनाएंगे। शहबाज ये भी जानते हैं कि इमरान खान की राजनीतिक वापसी उनकी सत्ता से विदाई का रास्ता खोल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक संभावित समझौते के तहत इमरान खान को सबसे पहले मेडिकल और जेल से जुड़ी राहत मिल सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे पाबंदियां कम की जा सकती हैं और बाद में कुछ केस वापस लिए जा सकते हैं या उनमें नरमी बरती जा सकती है। सूत्र ने आगे बताया कि इसके बाद इमरान खान को राजनीति में लौटने की इजाजत दी जा सकती है लेकिन ऐसा तभी होगा जब वे सार्वजनिक या निजी तौर पर यह संकेत दें कि वे असीम मुनीर या सेना के साथ तुरंत कोई नया टकराव शुरू नहीं करेंगे।



By UJAGAR

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