रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े संशोधित विधेयक पर चर्चा और वोटिंग की तैयारी है। इस प्रस्ताव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात कही गई है। हालांकि, बिल पास होने के बाद भी भारत पर तुरंत टैरिफ लागू नहीं होगा। अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथ में रहेगा। संशोधित विधेयक में भारत और चीन समेत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले कई देशों को संभावित टैरिफ के दायरे में शामिल किया गया है। प्रस्तावित सूची में भारत, चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक का नाम शामिल बताया गया है। इन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देने का प्रस्ताव है। यह प्रावधान रूस के ऊर्जा कारोबार से जुड़े देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। अमेरिका का तर्क है कि रूस से कच्चे तेल की बिक्री से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को आर्थिक मदद देता है। इसी वजह से अमेरिकी सांसद रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उसके प्रमुख खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई को प्रभावित करना और मॉस्को पर युद्ध समाप्त करने के लिए आर्थिक दबाव बनाना बताया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विधेयक में टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है, न कि बिल पास होते ही भारत पर शुल्क अपने आप लागू करने का फैसला। पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट की विधायी प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होगी। कानून बनने के बाद भी राष्ट्रपति ट्रंप के पास यह तय करने का अधिकार रहेगा कि किन देशों पर और कब टैरिफ लगाया जाए।  भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता है। रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों और ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण स्रोतों में शामिल है। ऐसे में यदि अमेरिका 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और रूसी तेल की खरीद पर असर पड़ सकता है। हालांकि, भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उसकी ऊर्जा नीति देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 140 करोड़ से अधिक आबादी की जरूरतों पर आधारित है। विदेश मंत्रालय ने ऐसे प्रस्तावों पर नजर रखने की बात कही है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में बिल को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अंतिम वोटिंग की तैयारी की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, सदन में बिल को आगे बढ़ाने के लिए हुई प्रक्रिया में 214-211 का करीबी मतदान हुआ। अब इसकी अंतिम मंजूरी और आगे की विधायी प्रक्रिया पर सबकी नजर है।  फिलहाल भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगना तय नहीं है। यह एक प्रस्तावित व्यवस्था है, जिसके लागू होने के लिए अमेरिकी संसद की प्रक्रिया और राष्ट्रपति की मंजूरी दोनों जरूरी हैं।

By UJAGAR

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