बैंक कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी डिमांड अब फिर चर्चा में आ गई है. हफ्ते में 5 दिन काम करने मांग के लिए कर्मचारियों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने सरकार पर फैसला टालने का आरोप लगाते हुए सितंबर में कई हड़तालों का ऐलान किया है. संगठन का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया तो 26 अक्टूबर 2026 से हड़ताल शुरू की जा सकती है. UFBU ने 23 अगस्त को जारी सर्कुलर में यह जानकारी दी है. यूनियन की मांग है कि बैंक सोमवार से शुक्रवार तक खुलें और शनिवार-रविवार वीकेंड पर छुट्टी रहे. खास बात यह है कि इस बदलाव से कर्मचारियों के कुल काम के घंटे कम नहीं होंगे. शनिवार की छुट्टी की भरपाई के लिए सोमवार से शुक्रवार तक रोज करीब 40 मिनट ज्यादा काम करना होगा. 2024 में बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच इस प्रपोजल पर समझौता हो चुका था, लेकिन इसे लागू करने के लिए सरकार की मंजूरी और आधिकारिक नोटिफिकेशन अभी बाकी है. UFBU ने सितंबर में दो स्टेप्स में हड़ताल का ऐलान किया है. पहली देशव्यापी हड़ताल 11 सितंबर 2026 को होगी. इसके बाद 28, 29 और 30 सितंबर को लगातार तीन दिन हड़ताल का कार्यक्रम है. अगर इसके बाद भी कर्मचारियों की मांगों पर फैसला नहीं हुआ, तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है. यूनियन चाहती है कि सरकार पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने को लेकर स्पष्ट और भरोसेमंद आश्वासन दे. अभी बैंक महीने के सिर्फ दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं. बाकी शनिवार को शाखाएं खुलती हैं. प्रपोजल लागू होने के बाद पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को भी बैंक बंद रहेंगे. यानी बैंक कर्मचारियों को हर हफ्ते शनिवार और रविवार की छुट्टी मिलेगी. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि काम के कुल घंटे घट जाएंगे. 2024 के समझौते के मुताबिक सोमवार से शुक्रवार तक रोज करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम किया जाएगा. इसलिए यह बदलाव मुख्य रूप से काम के दिनों को व्यवस्थित करने से जुड़ा है. इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक कर्मचारियों की यूनियनों के बीच 8 मार्च 2024 को हुए वेतन समझौते में पांच दिन की बैंकिंग का प्रपोजल शामिल था. इसके तहत सभी शनिवार को बैंक की छुट्टी घोषित करने की बात कही गई थी. IBA ने सरकार के पास इस संबंध में प्रपोजल भी भेजा था. लेकिन केवल बैंक प्रबंधन और यूनियन के बीच समझौता होने से बैंक छुट्टियों में बदलाव अपने आप लागू नहीं होता. इसके लिए सरकार की ओर से आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूरी है. UFBU का कहना है कि समझौते को दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है, फिर भी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है. पांच दिन की बैंकिंग के अलावा UFBU नई परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का भी विरोध कर रही है. यूनियन का कहना है कि नई व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों और बाकी बैंक कर्मचारियों के इंसेंटिव में बड़ा अंतर हो सकता है. UFBU के मुताबिक, पहले हुए समझौते में बैंक के परफॉर्मेंस के आधार पर कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए इंसेंटिव की व्यवस्था पर सहमति बनी थी. यूनियन का आरोप है कि नई स्कीम में Scale IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को पर्सनल परफॉर्मेंस के आधार पर ज्यादा इंसेंटिव मिल सकता है, जबकि बाकी कर्मचारियों के लिए अमाउंट काफी कम होगा. यूनियन ने इसे भेदभाव से जोड़ा है. इस मुद्दे को लेकर मामला चीफ लेबर कमिश्नर के सामने चल रही बातचीत और दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही कानूनी प्रोसेस से भी जुड़ा है. अब सितंबर की हड़तालों के बीच सरकार के अगले कदम पर सभी की नजर है. अगर पांच दिन का बैंकिंग हफ्ता लागू होता है तो शनिवार को बैंक की शाखाओं में काम नहीं होगा. इसका असर खासतौर पर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो शनिवार को बैंक जाकर काम कराते हैं. हालांकि, UPI, ATM, नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग जैसी डिजिटल सर्विसेस सामान्य रूप से जारी रहेंगी. यानी पैसे भेजने, बिल भरने या ऑनलाइन बैंकिंग जैसे कई काम ब्रांच बंद होने के बावजूद किए जा सकेंगे. सबसे ज्यादा असर उन कामों पर असर होगा जिनके लिए बैंक ब्रांच जाना जरूरी होता है.
