टीएमसी सांसद व वकील कल्याण बनर्जी और वकील विश्वरूप भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की मतगणना के संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं (पीआईएल) दायर की हैं। कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि चुनाव आयोग काउंटिंग सेंटर्स पर सुपरवाइजर के तौर पर सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ही नियुक्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि वे यह फैसला नहीं ले सकते। इस मामले में अदालत को दखल देना चाहिए। वकील बिश्वरूप भट्टाचार्य ने हाईकोर्ट में एक पीआईएल दायर कर सवाल उठाया गया कि काउंटिंग सेंटर्स को अचानक क्यों बदल दिया गया है? जस्टिस कृष्णा राव ने दोनों मामलों में केस दायर करने की अनुमति दे दी है। इन पर सुनवाई आज बाद में होने की संभावना है। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। उससे पहले, काउंटिंग सेंटर्स से जुड़े दो मामले हाई कोर्ट में दायर किए गए थे। वोटिंग का पहला चरण 23 अप्रैल को खत्म हुआ था और दूसरा चरण बुधवार (29 अप्रैल) को पूरा हुआ। पूरे राज्य में वोटिंग के दोनों चरण काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे। इस बार, चुनाव आयोग ने राज्य में काउंटिंग सेंटर्स की संख्या पहले के मुकाबले कम कर दी है। 294 सीटों के लिए वोटों की गिनती 87 सेंटरों पर होगी। जिन जिलों में वोटों की गिनती होगी, उनकी लिस्ट जारी कर दी गई है। 2016 के विधानसभा चुनावों में, राज्य में 90 सेंटर्स पर वोटों की गिनती हुई थी। 2021 के चुनावों में, काउंटिंग सेंटर्स की संख्या 108 थी। इस बार, इसे घटाकर 87 कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने उन स्ट्रॉन्ग रूम्स की सुरक्षा के लिए पहले ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की 200 कंपनियां तैनात कर दी हैं, जहां ईवीएम रखी गई हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए, 4 मई के बाद भी केंद्रीय बलों की 500 कंपनियां अगले आदेश तक पश्चिम बंगाल में ही रहेंगी। पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को 142 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के दूसरे चरण में वोटिंग का प्रतिशत आधी रात तक 92.47 दर्ज किया गया, जिससे दोनों चरणों का कुल औसत प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 92.85 तक पहुंच गया।

By UJAGAR

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