आज भारत से लेकर अफगानिस्तान तक धरती कांपी है. जी हाँ, धरती के अलग-अलग हिस्सों में आज यानी शनिवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए. भारत के हिमाचल प्रदेश से लेकर अफगानिस्तान और म्यांमार तक भूकंप आया है. सबसे तेज झटकों वाला भूकंप अफगानिस्तान में आया. यहां हिमाचल प्रदेश और म्यांमार से अधिक तीव्रता थी. म्यांमार और हिमाचल प्रदेश के चंबा में तो एक ही दिन में दो बार धरती हिली है. इससे हड़कंप मच गया है. लोगों में दहशत का माहौल है. राहत की बात है कि इन भूकंपों की तीव्रता बहुत ज्यादा नहीं थी. इसलिए अभी इन झटकों से किसी बड़े नुकसान या जानमाल के नुकसान की संभावना नहीं दिख रही है. हिमाचल प्रदेश के चंबा में आज दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए. चंबा में पहला भूकंप आधी रात को आया तो दूसरा आज सुबह. जी हाँ, चंबा में 1 बजकर 25 मिनट पर पहला भूकंप आया. इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.8 थी. यह भूकंप धरती से 15 किलोमीटर अंदर की गहराई पर आया था. इसके बाद हिमाचल प्रदेश के चंबा में सुबह करीब 6 बजकर 20 मिनट पर 2.5 तीव्रता का भूकंप आया. म्यांमार में पहला भूकंप 12 बजकर 53 मिनट पर आया. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.3 ही थी. इसके बाद म्यांमार में सुबह करीब 9 बजकर 4 मिनट पर भूकंप आया. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.7 मापी गई।. भूकंप का केंद्र जमीन के करीब 134 किलोमीटर नीचे बताया गया है. इस तरह म्यांमार में दो भूकंप के झटकों ने सबको डरा दिया. राहत की बात है कि यहां अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई है. अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए. यहां सुबह 4 बजकर 43 मिनट पर 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. इसके अलावा अफगानिस्तान में एक और भूकंप की जानकारी सामने आई है. यह भूकंप सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर आया और इसकी तीव्रता 4.2 मापी गई. इस भूकंप की गहराई करीब 157 किलोमीटर बताई गई है. भूकंप से लोगों में दहशत का माहौल है. अफगानिस्तान भी दुनिया के उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां भूकंप का खतरा बना रहता है. देश का बड़ा हिस्सा सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों के करीब स्थित है. यहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं और कई बार तेज झटकों से बड़े स्तर पर नुकसान भी हो चुका है. भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण आते हैं. पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी और छोटी प्लेटों में बंटी हुई है. ये प्लेटें लगातार धीरे-धीरे एक-दूसरे की ओर बढ़ती, दूर जाती या एक-दूसरे के नीचे खिसकती रहती हैं. जब इन प्लेटों के बीच तनाव ज्यादा बढ़ जाता है तो अचानक ऊर्जा बाहर निकलती है. इसी ऊर्जा के कारण धरती की सतह पर कंपन महसूस होता है. इसे ही भूकंप कहा जाता है. हर भूकंप का असर एक जैसा नहीं होता. उसकी तीव्रता, गहराई, केंद्र से दूरी और स्थानीय जमीन की प्रकृति जैसे कई कारक यह तय करते हैं कि झटके कितने तेज महसूस होंगे और कितना नुकसान होगा.

By UJAGAR

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