दुनिया एक बार फिर खतरनाक बीमारी इबोला को लेकर चिंता में है. अफ्रीका के कई देशों में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने इसे “अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” घोषित कर दिया है. इसके बाद भारत सरकार भी सतर्क हो गई है और भारतीय नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है. भारत सरकार ने लोगों को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC), युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक इन देशों की यात्रा टालना ही बेहतर होगा. जो भारतीय नागरिक इन देशों में रह रहे हैं या वहां यात्रा कर रहे हैं, उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है. दरअसल इस बार इबोला का जो वायरस फैल रहा है, वह “बुंडीबुग्यो स्ट्रेन” कहलाता है. यह इबोला का बहुत दुर्लभ और खतरनाक रूप माना जाता है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई वैक्सीन या खास इलाज उपलब्ध नहीं है. इसी वजह से स्वास्थ्य एजेंसियां ज्यादा चिंतित हैं. WHO के मुताबिक अब तक इस बीमारी से 204 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 867 संदिग्ध मामले सामने आए हैं. यह इबोला का अब तक का दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप माना जा रहा है. इससे पहले 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला ने भारी तबाही मचाई थी. कांगो और युगांडा में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं. डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमित लोगों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है. अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों के संपर्क में संक्रमित मरीज आए थे, उनमें से केवल 20 प्रतिशत लोगों तक ही स्वास्थ्य टीमें पहुंच पाई हैं. ऐसे में बीमारी तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है. युगांडा में भी इबोला के नए मामले सामने आए हैं. वहीं रेड क्रॉस के तीन वॉलंटियर की भी मौत हो चुकी है. अफ्रीका CDC यानी अफ्रीकी रोग नियंत्रण केंद्र ने चेतावनी दी है कि यह वायरस अब 10 और देशों तक फैल सकता है. इनमें केन्या, तंजानिया, रवांडा, जाम्बिया और इथियोपिया जैसे देश शामिल हैं. इबोला एक बहुत खतरनाक बीमारी है, जिसमें मरीज को तेज बुखार, कमजोरी, शरीर में दर्द और कई बार अंदरूनी व बाहरी खून बहने जैसी समस्या हो सकती है. यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है. अफ्रीका के कई इलाकों में लोगों की पारंपरिक अंतिम संस्कार की रस्में भी बीमारी फैलने का कारण बन रही हैं. वहां लोग अपने प्रियजनों के शव को छूते हैं, जिससे संक्रमण बढ़ रहा है. कुछ जगहों पर स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय लोगों के बीच झड़पें भी हुई हैं. इसी बीच अमेरिका ने भी कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर जांच बढ़ा दी है. कई देशों ने मेडिकल टीम और जरूरी सामान भेजना शुरू कर दिया है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस खतरनाक बीमारी को रोकने पर टिकी है.
