दिल्ली की एक अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की याचिका पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को नोटिस जारी किया है। याचिका में सरमा के ‘मिया मुसलमानों’ पर दिए गए विवादित बयानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने हर्ष मंदर की रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया। मंदर ने 20 अप्रैल के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की थी, जिसमें सरमा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया गया था. 26 मई को दिए गए आदेश में कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों पर गौर किया, जिसमें गृह मंत्रालय द्वारा जारी जीरो एफआईआर के SOP का भी जिक्र था। कोर्ट ने सरमा और अन्य जवाबदेह पक्षकारों को 15 जुलाई 2026 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अप्रैल में हर्ष मंदर ने असम के तिनसुकिया जिले के डिगबोई में 27 जनवरी को दिए गए सरमा के बयान पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए अदालत का रुख किया था।याचिका के अनुसार, सरमा ने कहा था कि विशेष तीव्र समीक्षा (SIR) के दौरान चार से पांच लाख ‘मिया’ वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि “जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे” और “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न डाल सकें”। ‘मिया’ शब्द असम में बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए अपमानजनक माना जाता है, जिसे अक्सर बांग्लादेशी घुसपैठियों से जोड़कर देखा जाता है। मंदर के वकील ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने क्षेत्रीय अधिकारिता के आधार पर याचिका खारिज कर दी, जबकि संज्ञेय अपराध की सूचना किसी भी पुलिस स्टेशन में दी जा सकती है।अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

By UJAGAR

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