उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी शहर में सोमवार देर रात माकपा के जिला कार्यालय पर कथित हमला और आगजनी के प्रयास को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया। डीबीसी रोड स्थित पार्टी के जिला मुख्यालय ‘सुभाष सेन भवन’ में तोड़फोड़ और पार्टी के लाल झंडे जलाए जाने का आरोप है। घटना के बाद माकपा ने इसके लिए भाजपा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। माकपा के मुताबिक, हमले के दौरान कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं ने जब इसका विरोध किया तो दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई। पार्टी का दावा है कि इस झड़प में जलपाईगुड़ी सदर एरिया कमेटी के सचिव देवराज बर्मन समेत SFI और DYFI से जुड़े करीब 10 से 15 कार्यकर्ता घायल हुए हैं। हालांकि, हमले में भाजपा या ABVP की भूमिका के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। माकपा सूत्रों के अनुसार, सोमवार रात करीब 10:30 बजे डीबीसी रोड स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर अचानक लोगों की भीड़ पहुंची। आरोप है कि कुछ लोग लाठी-डंडे, लोहे की रॉड और ज्वलनशील पदार्थ लेकर आए थे। माकपा का दावा है कि कथित हमलावरों ने कार्यालय में घुसकर कुर्सियों, खिड़कियों के शीशों और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया। पार्टी की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्यालय के अंदर और बाहर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की गई। माकपा नेताओं का आरोप है कि कार्यालय के बाहर लगे पार्टी के लाल झंडों को भी कथित तौर पर फाड़कर आग के हवाले किया गया। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौके पर जुट गए। पार्टी का कहना है कि कार्यालय को बचाने के लिए पहुंचे छात्र और युवा कार्यकर्ताओं के साथ कथित हमलावरों की झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए। माकपा के अनुसार, जलपाईगुड़ी सदर एरिया कमेटी के सचिव देवराज बर्मन को भी चोटें आई हैं। इसके अलावा SFI और DYFI से जुड़े कई कार्यकर्ताओं के घायल होने का दावा किया गया है। कुछ घायलों को इलाज के लिए जलपाईगुड़ी जिला अस्पताल ले जाया गया। माकपा ने कुल 10 से 15 कार्यकर्ताओं के घायल होने का दावा किया है। घायलों की संख्या और चोटों की गंभीरता को लेकर आधिकारिक पुलिस आंकड़ा सामने आना बाकी है। माकपा के जलपाईगुड़ी जिला सचिव पीयूष मिश्र ने घटना को लेकर भाजपा और ABVP पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पार्टी कार्यालय पर हमला अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि कथित तौर पर सुनियोजित कार्रवाई थी। माकपा ने पुलिस पर हमले में शामिल लोगों की पहचान कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिले में आंदोलन किया जाएगा। दूसरी ओर, स्थानीय भाजपा और ABVP से जुड़े नेताओं ने माकपा के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि घटना को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और भाजपा का नाम बेवजह घसीटा जा रहा है। भाजपा की ओर से इसे स्थानीय विवाद या माकपा की कथित आंतरिक गुटबाजी से जोड़कर देखने की बात कही गई है। ऐसे में अब पुलिस जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी के प्रयास के पीछे कौन लोग थे। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव को देखते हुए पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। माकपा की ओर से शिकायत दिए जाने की बात कही गई है। अब पुलिस को कथित हमले के वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच करनी होगी। फिलहाल, BJP-ABVP पर लगाए गए आरोप राजनीतिक दलों के दावे हैं और इन्हें जांच पूरी होने से पहले साबित तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।

By UJAGAR

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