केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू-कश्मीर के लिए आधारभूत संरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-244 पर दो प्रमुख सुरंग परियोजनाओं तथा उनसे जुड़ी संपर्क सड़कों के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है। लगभग 9,800 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं का उद्देश्य जम्मू क्षेत्र, कश्मीर घाटी और चेनाब घाटी के बीच हर मौसम में निर्बाध तथा सुरक्षित सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है। लंबे समय से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के कारण प्रभावित रहने वाले इस क्षेत्र के लिए यह निर्णय केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक सुरंग अवसंरचना विकास क्षेत्रीय संतुलित विकास की आधारशिला सिद्ध होती है। स्वीकृत परियोजनाओं के अंतर्गत अनंतनाग-चेनानी गलियारे पर स्थित सिंहपोरा-वैलू खंड में लगभग 39 किलोमीटर लंबे मार्ग के हिस्से के रूप में करीब 10 किलोमीटर लंबी एकतरफा दोहरी सुरंग का निर्माण किया जाएगा। वहीं सुधमहादेव-द्रंगा खंड पर लगभग 13 किलोमीटर लंबे मार्ग में 8 किलोमीटर लंबी सुरंग विकसित की जाएगी। इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद डोडा, किश्तवाड़ और उधमपुर जैसे पर्वतीय जिलों की सड़क संपर्क व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा यात्रियों को लंबी दूरी, तीखे मोड़ों और जोखिमपूर्ण मार्गों से राहत मिलेगी। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सुरंगों के निर्माण से यात्रा की दूरी और समय दोनों में कमी आती है, जिससे ईंधन की बचत और परिचालन लागत में भी उल्लेखनीय कमी होती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोनों परियोजनाओं का संपूर्ण वित्तीय भार केंद्र सरकार वहन करेगी। लगभग 9,800 करोड़ रुपये की इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अवधि में सुरंगों के साथ आवश्यक संपर्क सड़कों, सुरक्षा प्रणालियों, आधुनिक वेंटिलेशन व्यवस्था, आपातकालीन निकास मार्गों और यातायात प्रबंधन संबंधी सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। अवसंरचना क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण अत्यंत जटिल तकनीकी प्रक्रिया होती है, जिसके लिए उन्नत इंजीनियरिंग, भू-वैज्ञानिक अध्ययन तथा अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होता है। यही कारण है कि ऐसी परियोजनाएं दीर्घकालिक राष्ट्रीय निवेश के रूप में देखी जाती हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग-244 के कई हिस्से भारी हिमपात, भूस्खलन और प्रतिकूल मौसम के कारण समय-समय पर बंद हो जाते हैं, जिससे स्थानीय निवासियों, पर्यटकों तथा व्यापारिक गतिविधियों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। नई सुरंगों के निर्माण के बाद इन जोखिमपूर्ण मार्गों से बचते हुए वर्षभर सुरक्षित और तेज आवागमन संभव हो सकेगा। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क किसी भी पर्वतीय क्षेत्र में पर्यटन वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार और अन्य सेवा क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं विकसित होंगी। साथ ही आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और राहत कार्यों की गति में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। डोडा, किश्तवाड़ और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि, बागवानी, वानिकी तथा स्थानीय व्यापार पर आधारित है। बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध होने से कृषि उत्पादों, फल, सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही अधिक तेज, सुरक्षित और किफायती हो सकेगी। इससे किसानों और स्थानीय उद्यमियों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक समय पर पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, सड़क अवसंरचना में सुधार का प्रत्यक्ष प्रभाव निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ता है। इसके अतिरिक्त शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं तक दूरस्थ क्षेत्रों की पहुंच आसान होने से सामाजिक विकास को भी गति मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील और पर्वतीय क्षेत्र में मजबूत सड़क नेटवर्क केवल नागरिक सुविधा का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक तैयारियों का भी महत्वपूर्ण आधार है। हर मौसम में चालू रहने वाले वैकल्पिक मार्ग आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव कार्यों तथा आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में सड़क, रेल, सुरंग और पुल जैसी आधारभूत संरचना परियोजनाओं पर विशेष बल दिया गया है, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिली है। राष्ट्रीय राजमार्ग-244 पर स्वीकृत ये दोनों सुरंग परियोजनाएं भी इसी व्यापक विकास दृष्टि का हिस्सा मानी जा रही हैं, जिनसे आने वाले वर्षों में चेनाब घाटी और समूचे जम्मू-कश्मीर की आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन क्षमता को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
