केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह क्षेत्र में गुरुवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र यानी NCS के अनुसार भूकंप सुबह 6 बजकर 5 मिनट और 15 सेकंड पर आया। इसकी तीव्रता 5.5 और केंद्र की गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। NCS ने इस भूकंप को समीक्षा के बाद आधिकारिक सूची में शामिल किया है। सुबह के समय अचानक धरती हिलने से लोगों में डर का माहौल बन गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कई लोग एहतियात के तौर पर घरों और कैंपों से बाहर निकल आए। हालांकि शुरुआती जानकारी में किसी के घायल होने, जान जाने या इमारतों को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं मिली है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं।NCS ने भूकंप के निर्देशांक 36.881 डिग्री उत्तर अक्षांश और 74.402 डिग्री पूर्व देशांतर दर्ज किए हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड में इसकी लोकेशन लेह-लद्दाख क्षेत्र और कारगिल से करीब 302 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में बताई गई है। इसलिए इसे सीधे लेह शहर के बीचोंबीच आया भूकंप कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। भूकंप की गहराई केवल 10 किलोमीटर थी। कम गहराई वाले भूकंपों में समान तीव्रता के गहरे भूकंपों की तुलना में सतह पर झटके अधिक महसूस हो सकते हैं। इसके बावजूद वास्तविक प्रभाव केंद्र से दूरी, स्थानीय चट्टानों और मिट्टी की संरचना तथा इमारतों की मजबूती पर निर्भर करता है। इससे पहले सोमवार, 10 अगस्त की रात महाराष्ट्र के पालघर जिले में करीब 56 मिनट के अंतर से दो भूकंप दर्ज किए गए थे। NCS के समीक्षा किए गए आंकड़ों के अनुसार पहला झटका रात 10 बजकर 4 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता 3.2 थी। दूसरा झटका रात 11 बजे आया और इसकी तीव्रता 3.4 दर्ज की गई। दोनों भूकंपों की गहराई पाँच किलोमीटर थी। जिला प्रशासन की शुरुआती सूचना में दोनों झटकों की तीव्रता 3.4 बताई गई थी, लेकिन NCS के अंतिम समीक्षा आंकड़ों में पहला झटका 3.2 और दूसरा 3.4 है। अधिकारियों के मुताबिक पालघर में इन झटकों से किसी व्यक्ति के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं मिली। पृथ्वी की ऊपरी परत कई टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से चलती रहती हैं। इनके किनारों और पृथ्वी की दरारों यानी फॉल्ट पर चट्टानें घर्षण के कारण कुछ समय के लिए अटक सकती हैं। जब चट्टानों पर जमा दबाव घर्षण की सीमा से अधिक हो जाता है, तो फॉल्ट पर अचानक खिसकाव होता है। इससे वर्षों से जमा ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलती है। जब ये तरंगें धरती की सतह तक पहुँचती हैं, तो जमीन हिलती हुई महसूस होती है। भूकंप से होने वाले नुकसान का फैसला केवल उसकी तीव्रता से नहीं किया जा सकता। केंद्र आबादी से कितनी दूर है, भूकंप कितना गहरा है, मिट्टी और चट्टानें कैसी हैं तथा इमारतें भूकंपरोधी हैं या नहीं—ये सभी बातें प्रभाव को निर्धारित करती हैं। USGS के अनुसार ऐसी कोई निश्चित तीव्रता नहीं है, जिसके ऊपर पहुंचते ही हर भूकंप नुकसान करेगा। सामान्यतः चार या पांच से अधिक तीव्रता वाले भूकंपों में नुकसान की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन कमजोर इमारतें छोटे झटकों में भी प्रभावित हो सकती हैं और मजबूत निर्माण किसी बड़े भूकंप का बेहतर सामना कर सकता है। ये केवल सामान्य संकेत हैं, नुकसान की गारंटीकृत श्रेणियां नहीं हैं। वास्तविक झटकों की तीव्रता अलग-अलग स्थानों पर अलग हो सकती है।आम बोलचाल में भूकंप की तीव्रता को अक्सर रिक्टर स्केल पर बताया जाता है। आधुनिक भूकंप विज्ञान एजेंसियां घटना के आकार को अलग-अलग मैग्नीट्यूड स्केल से मापती हैं। किसी भूकंप का मैग्नीट्यूड एक होता है, लेकिन अलग-अलग स्थानों पर महसूस होने वाली कंपन की तीव्रता बदल सकती है। इसलिए समाचार में “5.5 तीव्रता का भूकंप” या “मैग्नीट्यूड 5.5” लिखना अधिक सटीक है। बाहर हों तो इमारतों, बिजली के खंभों, तारों और पेड़ों से दूर खुले स्थान पर जाएं। वाहन में हों तो सड़क किनारे सुरक्षित जगह रुकें, लेकिन पुल, सुरंग, बिजली के तार या कमजोर ढांचे के नीचे न रुकें। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान भी भूकंप के दौरान “ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन” का अभ्यास करने की सलाह देता है। भूकंप रुकने के बाद गैस लीकेज, बिजली के टूटे तार और दीवारों में आई नई दरारों की जांच करें। गैस की गंध आने पर माचिस, लाइटर या बिजली का स्विच न चलाएं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की सूचना पर भरोसा करें तथा सोशल मीडिया पर पुराने या भ्रामक वीडियो साझा करने से बचें। किसी व्यक्ति के मलबे में दबे होने की स्थिति में खुद जोखिम लेकर अंदर जाने के बजाय पुलिस, अग्निशमन सेवा या आपदा प्रबंधन टीम को सूचना दें।

By UJAGAR

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