पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर शुरू हुआ संकट अब दिल्ली तक पहुंच गया है। राज्यसभा में टीएमसी को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं। महज चार दिनों के भीतर पार्टी के तीन सांसदों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गुरुवार को उत्तर बंगाल के प्रमुख आदिवासी चेहरा और राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सोमवार को सुखेंदु शेखर राय और बुधवार को सुस्मिता देव ने सांसद पद से इस्तीफा देने के साथ ही टीएमसी का साथ भी छोड़ दिया था। हालांकि, प्रकाश चिक बड़ाइक ने अभी तक पार्टी छोड़ने का एलान नहीं किया है। अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले प्रकाश चिक बड़ाइक का राजनीतिक सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। अलीपुरद्वार जिले के कुमारग्राम के रहने वाले प्रकाश ने अपने करियर की शुरुआत एक साधारण चाय बागान मजदूर के रूप में की थी। धीरे-धीरे वे टीएमसी के श्रमिक संगठन के जरिए आगे बढ़े और चाय बागान मजदूरों के हक की आवाज बनकर उभरे। साल 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें अलीपुरद्वार का जिला अध्यक्ष बनाया और उनकी अगुवाई में पार्टी ने स्थानीय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद साल 2023 में अभिषेक बनर्जी की पैरवी पर पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। वे अलीपुरद्वार जिले के पहले राज्यसभा सांसद बने थे। उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उम्मीदवार बनाया गया था, लेकिन वे हार गए थे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में भारी बिखराव देखा जा रहा है। लोकसभा में भी टीएमसी के 28 सांसदों में से केवल 8 सांसद ही अब ‘ममतो के वफादार’ बचे हैं, जबकि अधिकांश सांसदों ने बगावत का रुख अख्तियार कर लिया है। राज्यसभा का गणित: पिछले हफ्ते तक राज्यसभा में टीएमसी के कुल 13 सांसद थे। लेकिन सुखेंदु शेखर, सुस्मिता देव और अब प्रकाश चिक बड़ाइक के इस्तीफे के बाद उच्च सदन में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर 10 रह गई है। पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की कुल 16 सीटें आती हैं, जिनमें से फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास केवल 3 सीटें हैं। लेकिन अब बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच, टीएमसी सांसदों द्वारा खाली की गई इन सीटों पर जब भी उपचुनाव होंगे, तो राज्य विधानसभा में ताकत बढ़ने के कारण इन सीटों पर बीजेपी की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है। इससे राज्यसभा में टीएमसी और कमजोर होगी, जबकि बीजेपी की ताकत में बड़ा इजाफा होगा।

By UJAGAR

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