शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा उपचुनावों के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पार्टी नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाने के चुनाव आयोग के फैसले की कड़ी निंदा की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखा पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ने और उनके चुनाव चिह्न छीनने का काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने बयान में अतीत के उदाहरण देते हुए कहा कि पहले शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ यही पैटर्न अपनाया गया और अब तृणमूल कांग्रेस को निशाना बनाया जा रहा है। हर मामले में भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर पार्टियों को विभाजित करते हैं और अंततः उनके चुनाव चिह्नों को जब्त कर लिया जाता है। कांग्रेस नेता ने कड़े शब्दों में कहा कि जब पूरी पार्टी ही चुराई जा सकती है, तो यह हैरानी की बात नहीं है कि लाखों भारतीयों के वोट भी चुरा लिए जाएं। उन्होंने ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ को देश में लोकतांत्रिक मूल्यों के पतन का प्रतीक करार दिया है। चुनावआयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है। इसके विपरीत, वह उन्हीं ताकतों की मदद कर रहा है जो जनता के फैसले को पलटने का काम कर रही हैं। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल ममता बनर्जी का व्यक्तिगत संघर्ष नहीं है। यह देश के हर उस राजनीतिक दल और हर उस मतदाता की लड़ाई है, जो देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद राष्ट्रीय और राज्य की राजनीति में सरगर्मी और तेज हो गई है। एक तरफ जहां टीएमसी पहले से ही अपने अस्तित्व और चुनाव चिह्न को बचाने की कानूनी व राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है, वहीं विपक्ष के इस मुखर समर्थन से इस मुद्दे पर सियासी घमासान और अधिक गहरा गया है।

