पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी का असर घरेलू शेयर बाजार पर देखने को मिला। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 1124 अंक से ज्यादा टूटकर 72,771.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 360 अंक गिरकर 22,780.25 पर आ गया। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 8 लाख करोड़ रुपये घटकर 474 लाख करोड़ रुपये के आसपास रह गया। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1.52 फीसदी यानी 1124.02 अंक की गिरावट के साथ 72,771.72 पर बंद हुआ। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 1.56 फीसदी यानी 360.25 अंक टूटकर 22,780.25 के स्तर पर पहुंच गया। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में गिरावट दर्ज की गई। इन्फोसिस एकमात्र ऐसा शेयर रहा, जो 0.20 फीसदी की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। बाजार में भारी बिकवाली के चलते बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 8 लाख करोड़ रुपये घट गया। यह गिरकर लगभग 474 लाख करोड़ रुपये रह गया। कारोबारी सत्र के दौरान शुरुआती समय में ही निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका था, जो बाजार बंद होने तक बढ़कर करीब 8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव शामिल है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। ईरान की ओर से युद्धविराम और होर्मुज को खोलने का प्रस्ताव दिए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया। इससे निवेशकों की चिंता बढ़ी। पश्चिम एशिया के तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के चलते कच्चे तेल की कीमत में करीब 2 फीसदी का उछाल आया और यह 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में महंगे तेल से महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की चिंता बाजार पर असर डाल रही है। अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 5.2 फीसदी से ऊपर पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह 2004 के बाद का ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ता है, क्योंकि अधिक रिटर्न के कारण विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड आकर्षक हो सकते हैं। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली। रुपया 28 पैसे टूटकर 96.03 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। रुपये में कमजोरी और महंगे कच्चे तेल की चिंता ने बाजार के दबाव को और बढ़ाया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 3694 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। सितंबर में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली 25,682 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। कारोबारी सत्र की शुरुआत भी गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स 73,734.83 पर खुला, जबकि निफ्टी की ओपनिंग 23,064.90 के स्तर पर हुई। दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा और बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड उस रिटर्न को दर्शाती है, जो निवेशकों को अमेरिकी सरकारी बॉन्ड से मिलता है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो अमेरिकी बॉन्ड में निवेश का आकर्षण बढ़ सकता है। ऐसे में विदेशी निवेशकों की ओर से उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर शेयर बाजार पर पड़ता है। सेंसेक्स में इन्फोसिस 0.20 फीसदी की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। वहीं लार्सन एंड टुब्रो में 2.81 फीसदी, पावरग्रिड में 2.62 फीसदी, अडानी पोर्ट्स में 2.38 फीसदी, एचडीएफसी बैंक में 2.30 फीसदी और हिंदुस्तान यूनिलीवर में 2.27 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज 1.67 फीसदी, इन्फोसिस 0.30 फीसदी और एचडीएफसी लाइफ 0.11 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स 3 फीसदी, अडानी एंटरप्राइजेज 2.93 फीसदी, जियो फाइनेंस 2.86 फीसदी, पावरग्रिड 2.84 फीसदी और लार्सन एंड टुब्रो 2.83 फीसदी नीचे रहे।

By UJAGAR

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