सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसके तहत ₹2000 से अधिक के यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल इस फ़्रेमवर्क के लागू होने पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया है। जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी को नोटिस जारी कर चार हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। यह याचिका वकील आशुतोष दुबे के माध्यम से वकील अंजन दत्ता द्वारा दायर की गई है। इसमें केंद्र सरकार के 14 सितंबर 2026 के उस गजट नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है, जिसे पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत जारी किया गया था। इसके अलावा, 15 सितंबर को घोषित उस फ्रेमवर्क को भी चुनौती दी गई है, जिसके जरिए ₹2000 से ज्यादा के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर MDR लगाने की बात कही गई है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमन ने कहा कि ये चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होंगे और 96 प्रतिशत ट्रांजैक्शन पर यह चार्ज नहीं लगेगा। केंद्र के लॉ ऑफिसर ने यह भी कहा कि जरूरी सेवाओं के लिए चार्ज की सीमा ₹5 तय की गई है। ASG वेंकटरमन ने कहा, ‘यह जबरदस्ती वसूली नहीं है।’ उन्होंने समझाया कि प्रस्तावित चार्ज पेमेंट एग्रीगेटर और बैंकों के बीच सेटलमेंट फीस है और सरकार को इसका कोई हिस्सा नहीं मिल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने में बैंकों का खर्च आता है और क्रेडिट और डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगता है, जबकि UPI पेमेंट को अब तक ऐसे चार्ज से छूट मिली हुई थी। उन्होंने कहा कि UPI इकोसिस्टम को ठीक से काम करते रहने के लिए यह लेवी (शुल्क) जरूरी है। पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने हलफनामे पर जरूरी तथ्य और जानकारी मांगी और मामले की सुनवाई चार फहते बाद के लिए तय कर दी। याचिकाकर्ता के वकील ने इस फ्रेमवर्क को लागू करने पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर ये शुल्क लागू होते हैं, तो इससे भ्रष्टाचार बढ़ सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह याचिका 2,000 रुपये से ज्यादा के खास P2M UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित 0.4% MDR को चुनौती देती है। इसमें 75,000 रुपये और उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए अधिकतम शुल्क 300 रुपये तय किया गया है, और कुछ सेक्टर के लिए अलग-अलग दरें हैं। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कहा था कि ज्यादा वैल्यू वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर थोड़ी सी फीस लगाने से इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और टियर III-VI शहरों और ग्रामीण इलाकों में छोटे व्यापारियों को मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि ग्राहकों के लिए UPI मुफ्त रहेगा और ट्रांजैक्शन की रकम चाहे कितनी भी हो, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान फ्री बने रहेंगे। मंत्रालय ने कहा कि UPI QR कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक कमाने वाले व्यापारियों के लिए कोई चार्ज नहीं लगेगा, जबकि 2000 रुपये से कम के 95 प्रतिशत से ज्यादा मर्चेंट पेमेंट मुफ्त रहेंगे। RBI ने ज्यादा वैल्यू वाले UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने को डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की लंबे समय की सस्टेनेबिलिटी को मजबूत करने की दिशा में एक कदम बताया है।
