मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में दान राशि की कथित चोरी को लेकर बढ़े राजनीतिक विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार ने ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के खातों का ऑडिट कराने का आदेश दिया है। मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मंगलवार को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की थी, जिसके बाद कानून एवं न्याय विभाग को ऑडिट कराने का निर्देश दिया गया। यही विभाग सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज की निगरानी करता है। ट्रस्ट अध्यक्ष सदा सरवणकर के अनुसार, सरकार पिछले पांच वर्षों के वित्तीय खातों की जांच कराएगी। ऑडिट के दौरान अलग-अलग वर्षों में प्राप्त दान, दर्ज आय और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है। हालांकि, ऑडिट के विस्तृत कार्यक्षेत्र यानी Terms of Reference की आधिकारिक प्रति अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए नकदी के साथ दान में मिले प्रत्येक सोने-चांदी के आभूषण को अलग से इसी जांच में शामिल किए जाने का दावा औपचारिक आदेश सामने आने से पहले नहीं किया जाना चाहिए। मंदिर की सामान्य लेखा व्यवस्था में सोने, आभूषणों और दूसरी बहुमूल्य वस्तुओं का अलग रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया पहले से मौजूद है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने एक कार्यक्रम में दावा किया था कि सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटियों से हर साल करीब ₹18 करोड़ की राशि की हेराफेरी हो रही थी। अपने आरोप के समर्थन में उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के आठ सदस्यों द्वारा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे गए एक पत्र के हिस्से पढ़े थे। राज ठाकरे ने कहा कि कथित चोरी में शामिल कर्मचारियों पर कार्रवाई से पहले मंदिर की साप्ताहिक दान राशि ₹50 लाख से कम रहती थी। कार्रवाई के बाद कुछ सप्ताह में यह बढ़कर करीब ₹1.5 करोड़ तक पहुंच गई। इसी अंतर के आधार पर उन्होंने सालाना नुकसान का अनुमान करीब ₹18 करोड़ बताया। ₹18 करोड़ की राशि को फिलहाल प्रमाणित गबन या जांच में तय नुकसान नहीं माना जा सकता। यह राशि दान संग्रह में आए कथित अंतर के आधार पर लगाया गया अनुमान है। इंडियन एक्सप्रेस की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार ₹18 करोड़ का आंकड़ा न तो मार्च में दर्ज एफआईआर में है और न ही उपलब्ध आरोपपत्र में। मंदिर ट्रस्ट ने भी इसे जांच पूरी होने से पहले निश्चित नुकसान के रूप में स्वीकार नहीं किया है। इसलिए खबर के शीर्षक और कॉपी में “कथित चोरी”, “आरोप” या “अनुमानित नुकसान” जैसे शब्दों का इस्तेमाल जरूरी है। दान पेटी से नकदी निकालने का मामला मार्च 2026 में सामने आया था। मंदिर अधिकारियों ने नियमित CCTV जांच के दौरान एक कर्मचारी की गतिविधि संदिग्ध पाई थी। फुटेज में कथित रूप से कर्मचारी को दान पेटी से पैसे निकालते देखा गया, जिसके बाद दादर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। प्रारंभिक मामले में एक कर्मचारी पर करीब ₹10 हजार निकालने का आरोप था। बाद की जांच में अन्य कर्मचारियों की संभावित भूमिका भी सामने आई और पुलिस कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया। इस मामले में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर सार्वजनिक रिपोर्टों में अंतर है। हिंदुस्तान टाइम्स, इकोनॉमिक टाइम्स और आजतक की ताजा रिपोर्टों में आठ कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और बाद में जमानत मिलने की जानकारी दी गई है। दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में ट्रस्ट अध्यक्ष के बयान के आधार पर नौ लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया है। इसलिए आधिकारिक पुलिस ब्योरा सामने आने तक खबर में “आठ या नौ गिरफ्तारी” को निश्चित संख्या की तरह लिखने के बजाय स्रोत का उल्लेख करना अधिक विश्वसनीय रहेगा। ट्रस्ट अध्यक्ष सदा सरवणकर ने आरोपों को मौजूदा प्रबंधन से जोड़ने का विरोध किया है। उनका कहना है कि वर्तमान बोर्ड ने ही प्रशासनिक खामियां पहचानीं, CCTV फुटेज की जांच कराई, पुलिस में मामला दर्ज कराया और सरकार से ऑडिट की मांग की। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि उसने मई में कानून एवं न्याय विभाग को पत्र लिखकर दान संग्रह और वित्तीय रिकॉर्ड का विस्तृत ऑडिट कराने की मांग कर दी थी। यह पत्र राज ठाकरे के सार्वजनिक आरोपों से पहले भेजा गया था। सरवणकर के अनुसार ट्रस्ट की दर्ज वार्षिक आय 2022-23 में ₹104 करोड़, उसके बाद ₹137 करोड़ और वर्तमान वर्ष में ₹182 करोड़ तक पहुंची। ये आंकड़े ट्रस्ट अध्यक्ष का दावा हैं; सरकारी ऑडिट में इनका स्वतंत्र सत्यापन किया जाएगा। दान पेटी विवाद के अलावा मंदिर के कुछ कर्मचारियों पर भक्तों से पैसे लेकर VIP दर्शन कराने का भी आरोप सामने आया है। ट्रस्ट का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाए गए कई कर्मचारियों को निलंबित किया गया और अवैध दर्शन व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा तथा निगरानी व्यवस्था बदली गई। ट्रस्ट के अनुसार दान पेटियों की राशि हर बुधवार को CCTV निगरानी में गिनी जाती है और उसी दिन बैंक में जमा की जाती है। सोने या आभूषण जैसी वस्तुओं को नकदी से अलग कर उनका वजन, मूल्यांकन और रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। ट्रस्ट अध्यक्ष ने कहा है कि उन्होंने सुरक्षा सुधारों के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल से मार्गदर्शन लिया था। हालांकि नकदी चोरी से जुड़ी एफआईआर और गिरफ्तारियां दादर पुलिस की कार्रवाई से संबंधित हैं। इसलिए इसे सीधे “ACB की जांच” लिखना अभी सटीक नहीं होगा, जब तक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से औपचारिक जांच दर्ज किए जाने का आदेश सामने न आए। सरकार का नया आदेश वित्तीय ऑडिट के लिए कानून एवं न्याय विभाग से संबंधित है। सदा सरवणकर और ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि संदिग्ध कर्मचारियों में से कुछ की नियुक्तियां पूर्व ट्रस्ट बोर्ड के कार्यकाल में हुई थीं। इस दावे के बाद शिवसेना के दोनों गुटों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। शिवसेना (UBT) नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि जिम्मेदारी किसकी है, इसका फैसला जांच एजेंसियों और ऑडिट से होना चाहिए। मौजूदा या पूर्व समिति के किसी सदस्य की भूमिका ऑडिट अथवा जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित नहीं मानी जा सकती। वित्तीय जांच का मुख्य उद्देश्य यह समझना होगा कि अलग-अलग वर्षों में दान संग्रह में इतना अंतर क्यों आया। ऑडिट में संभावित रूप से इन बिंदुओं का मिलान किया जा सकता है:

  • दान पेटियों में प्राप्त नकदी और बैंक में जमा राशि
  • साप्ताहिक एवं वार्षिक संग्रह के रिकॉर्ड
  • आंतरिक तथा बाहरी ऑडिट रिपोर्ट
  • दान पेटियों को खोलने और गिनती की प्रक्रिया
  • CCTV, ड्यूटी रोस्टर और अधिकृत कर्मचारियों की भूमिका
  • सोने-चांदी एवं दूसरी बहुमूल्य वस्तुओं का लेखा रिकॉर्ड
  • ऑनलाइन दान, पूजा बुकिंग और आधिकारिक रसीदें
  • अलग-अलग वर्षों में आय बढ़ने या घटने के कारण।

ऑडिट में अनियमितता मिलना और किसी व्यक्ति का आपराधिक रूप से दोषी पाया जाना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। आपराधिक जिम्मेदारी पुलिस जांच, साक्ष्यों और अदालत के निर्णय से तय होगी। ऑडिट का आदेश मंदिर के वित्तीय रिकॉर्ड से संबंधित है। उपलब्ध सरकारी और ट्रस्ट अपडेट में दर्शन बंद करने, मंदिर का समय बदलने या सामान्य पूजा व्यवस्था पर रोक लगाने की कोई घोषणा नहीं की गई है। मंदिर की आधिकारिक सलाह के अनुसार नकद दान केवल परिसर में रखी अधिकृत दान पेटियों, पूजा बुकिंग काउंटर या अकाउंट्स ऑफिस में देना चाहिए। किसी व्यक्ति, कर्मचारी, फूल विक्रेता, टैक्सी चालक या अनधिकृत एजेंट को नकद नहीं सौंपना चाहिए। डिजिटल या चेक से दान करते समय आधिकारिक रसीद सुरक्षित रखना जरूरी है।

By UJAGAR

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