पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने वाले तृणमूल कांग्रेस के 22 लोकसभा सांसदों ने दलबदल कानून की पेचीदगियों से बचने के लिए रविवार को नई दिल्ली में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी (एनसीपी) की सदस्यता ग्रहण कर ली। बागी गुट के वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर दो-तिहाई बहुमत के हस्ताक्षरों का सत्यापन कराने के बाद इस रणनीतिक विलय की घोषणा की। हालिया चुनावों में पार्टी की हार से असंतुष्ट इन सांसदों ने भविष्य में मूल तृणमूल कांग्रेस के नाम और सिंबल पर दावा ठोकने की रणनीति बनाई है ताकि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को बाहर से बिना किसी कानूनी अड़चन के मजबूत समर्थन दिया जा सके। बागी सांसदों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी संसद सदस्यता को सुरक्षित रखने की थी। दलबदल विरोधी कड़े कानून से पार पाने के लिए सांसदों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी को चुना। यह दल मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत के असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में सक्रिय तथा चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त एक क्षेत्रीय राजनीतिक इकाई है। इस क्षेत्रीय दल में अपने पूरे समूह का तकनीकी रूप से विलय कराकर बागी गुट ने खुद को अयोग्य घोषित होने के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है। सुदीप बंद्योपाध्याय ने साफ किया कि दो-तिहाई बहुमत होने के बाद भी वे तकनीकी कारणों से पहले ही दिन मूल पार्टी के नाम पर दावा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के दौरान अपने साथ मौजूद 20 सांसदों के हस्ताक्षरों का भौतिक सत्यापन कराया। दो और सांसदों के इस खेमे में आने के बाद कुल संख्या 22 हो गई है। बागी गुट के रणनीतिकारों के अनुसार आगामी जुलाई महीने में वे चुनाव आयोग और अदालत के समक्ष आधिकारिक तौर पर खुद को ही असली तृणमूल कांग्रेस घोषित करने की कानूनी अर्जी दाखिल करेंगे। इस अभूतपूर्व राजनीतिक तख्तापलट की अंतिम पटकथा देश की राजधानी में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सरकारी आवास पर हुई एक अत्यंत गोपनीय बैठक के दौरान लिखी गई। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में काकोली घोष दस्तीदार, पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान और सायोनी घोष जैसे चर्चित चेहरे शामिल थे। बागी नेताओं ने स्पष्ट किया कि बंगाल विधानसभा के हालिया नतीजों में पार्टी के लचर प्रदर्शन के बाद से ही आलाकमान के खिलाफ असंतोष पनप रहा था। इसके साथ ही बिहार मूल के टीएमसी सांसदों की भूमिका को लेकर भी इस गुट ने दिल्ली के गलियारों में तीखी टिप्पणियां की हैं।
