अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने अपने ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत पश्चिम बंगाल कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बड़े पैमाने पर रद्दोबदल किया है। पार्टी ने राज्य के संगठनात्मक जिलों की संख्या 33 से बढ़ाकर 35 कर दी है और कई जिलों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की है। इस फेरबदल के तहत सबसे बड़ा बदलाव उत्तर दिनाजपुर जिले में देखने को मिला है, जहां रायगंज के पूर्व विधायक मोहित सेनगुप्त का 26 साल पुराना जिलाध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो गया है। AICC की ओर से जारी सूची में उत्तर दिनाजपुर का नया जिलाध्यक्ष तुषार कांति गुहा को बनाया गया है। रायगंज यूनिवर्सिटी कॉलेज की छात्र परिषद से राजनीति की शुरुआत करने वाले तुषार कांति गुहा लंबे समय से जिला कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। राजनीतिक हलकों में उन्हें मोहित सेनगुप्त का करीबी और शिष्य माना जाता है। जिम्मेदारी मिलने के बाद तुषार कांति गुहा ने स्पष्ट किया कि संगठन को पुनर्गठित करना और पार्टी को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता है। अंदरूनी गुटबाजी और बगावत के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने संदेश दिया, “पहले दल, बाद में कार्यकर्ता। पार्टी से ऊपर कोई नहीं है।” उन्होंने आगामी रायगंज नगर पालिका चुनाव में भी पूरी मजबूती से उतरने का दावा किया। संगठनात्मक फेरबदल का असर कोलकाता में भी देखने को मिला। दक्षिण कोलकाता में लंबे समय से जिलाध्यक्ष रहे वरिष्ठ नेता प्रदीप प्रसाद को हटाकर प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता मीता चक्रवर्ती को कमान सौंपी गई है। इस फैसले के बाद प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ विरोध के सुर मुखर हो गए हैं। प्रदीप प्रसाद ने खुलकर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जिन्होंने साल भर जिले में काम किया, उन्हें हटाकर ‘प्राइज पोस्टिंग’ दी गई है। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि 5 साल का कार्यकाल पूरा होने के कारण नियम के तहत यह बदलाव किया गया है। संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत मुर्शिदाबाद जिले को विभाजित कर जंगईपुर को नया संगठनात्मक जिला बनाया गया है। वहीं उत्तर 24 परगना में बशीरहाट को अलग जिला संगठन का दर्जा दिया गया है।

  1. मुर्शिदाबाद: मोहम्मद अब्दुल्लाही काफी (जिन्हें रेजीनगर उपचुनाव में उम्मीदवार भी बनाया गया है)।
  2. जंगईपुर: अलफाज उद्दीन बिस्वास।
  3. बशीरहाट: बाबू गाजी।
  4. पुरुलिया: फणीभूषण कुमार (नेपाल महतो का कार्यकाल समाप्त होने के बाद)।
  5. हावड़ा ग्रामीण: सुब्रत बेरा।
  6. पूर्व बर्धमान: गौरव समद्दार।
  7. बांकुड़ा: अभिषेक विश्वास।
  8. जलपाईगुड़ी: नारायण चंद्र सरकार।

प्रदेश नेतृत्व के अनुसार, कार्यकाल पूरा होने के नियमों के तहत ही अधिकांश बदलाव किए गए हैं और किसी भी नेता के प्रति व्यक्तिगत द्वेष के तहत कार्रवाई नहीं की गई है।

By UJAGAR

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