पश्चिम बंगाल पुलिस के डेटा सेंटर पर साइबर हमले की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस हमले का असर पुलिस के CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) पर पड़ा है। CCTNS पुलिस विभाग का एक अहम डिजिटल सिस्टम है, जिसमें FIR, चार्जशीट और मामलों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर हमले के बाद पुलिस के डिजिटल सिस्टम में दिक्कत आई है और कुछ संवेदनशील डेटा तक अनधिकृत पहुंच की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस विभाग को अलर्ट कर दिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर भवानी भवन की ओर से राज्यभर के पुलिस अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। फिलहाल साइबर सेल पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमलावरों ने सिस्टम में किस स्तर तक पहुंच बनाई। CCTNS को पुलिस विभाग के महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम में शामिल किया जाता है। इसमें FIR, चार्जशीट और मामलों से जुड़ी अन्य जानकारियां दर्ज की जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत कई महत्वपूर्ण पुलिस दस्तावेज इस सिस्टम पर अपलोड किए जाते हैं। बताया जा रहा है कि गुरुवार तड़के करीब 10 बजे राज्य के डेटा सेंटर पर साइबर हमला हुआ। जांचकर्ताओं को आशंका है कि हमलावरों ने CCTNS से जुड़ी जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश की। कोलकाता पुलिस और कलिम्पोंग जिला पुलिस से जुड़ी जानकारी भी प्रभावित होने की बात कही जा रही है।हालांकि, कितना डेटा प्रभावित हुआ है, इसकी आधिकारिक स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी। साइबर हमले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस विभाग को अलर्ट कर दिया गया है। भवानी भवन की ओर से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। सभी पुलिस वेबसाइटों और संबंधित डिजिटल सिस्टम से लॉगआउट करने को कहा गया है। इस कदम का उद्देश्य संभावित डेटा लीक या अनधिकृत पहुंच को रोकना बताया जा रहा है। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि हमलावरों ने सिस्टम में किस स्तर तक पहुंच बनाई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कोई संवेदनशील दस्तावेज या जानकारी बाहर गया है या नहीं। फिलहाल पुलिस के साइबर विशेषज्ञ पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रहे हैं। पुलिस सर्वर पर राज्य की कई पूजा समितियों से जुड़ी जानकारी भी मौजूद होने की बात कही जा रही है। इन समितियों को सरकारी फंड भेजे जाने से संबंधित दस्तावेज और बैंक खाते की जानकारी भी सिस्टम में हो सकती है।जांचकर्ताओं को आशंका है कि अगर इन डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनी है, तो बैंक संबंधी जानकारी भी जोखिम में हो सकती है। हालांकि, इस जानकारी के वास्तव में लीक होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। साइबर सेल डेटा उल्लंघन के स्तर का पता लगाने के लिए जांच कर रहा है।अधिकारियों की ओर से संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही नुकसान और डेटा एक्सेस की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक महीने पहले भी राज्य पुलिस से जुड़े कई साइबर हमले सामने आए थे। नए हमले के बाद पूरे राज्य के पुलिस विभाग को एक बार फिर अलर्ट पर रखा गया है। हाल के दिनों में STF ने साइबर और जासूसी से जुड़े मामलों में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गिरफ्तार आरोपियों में कुछ पाकिस्तानी नागरिक और कथित पाकिस्तानी जासूस भी शामिल हैं। इन घटनाओं के बीच नए साइबर हमले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, मौजूदा साइबर हमले और इन गिरफ्तारियों के बीच कोई सीधा संबंध अभी सामने नहीं आया है। पुलिस की साइबर क्राइम शाखा पूरे मामले की अलग-अलग एंगल से जांच कर रही है। पश्चिम बंगाल पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सिस्टम में सेंध किस तरह लगाई गई। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि हमलावरों ने किन-किन जानकारियों तक पहुंच बनाई। जांचकर्ताओं को आशंका है कि पुलिस मामलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश की गई हो सकती है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि डेटा सिर्फ एक्सेस किया गया या उसे कॉपी अथवा बाहर ट्रांसफर भी किया गया। हमले के पीछे कौन है और इसका उद्देश्य क्या था, इसकी भी जांच जारी है। फिलहाल किसी विदेशी संगठन या देश की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

By UJAGAR

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