पिछले कुछ दिनों से अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि खुली जंग के बावजूद, ईरान और अमेरिका के बीच सीज़फ़ायर को लेकर सीक्रेट बातचीत चल रही है। गुरुवार को उन्होंने फिर दावा किया कि ईरान ने दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को लेकर ‘गुडविल जेस्चर’ के तौर पर अमेरिका को तेल से भरे 10 जहाज़ ‘गिफ़्ट’ के तौर पर दिए हैं। कई इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब ये तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रे तो उन पर पाकिस्तानी झंडे लगे थे।

क्या होर्मुज स्ट्रेट में बर्फ़ पिघल रही है?

व्हाइट हाउस में कैबिनेट मीटिंग में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने शुरू में 8 बड़े तेल जहाज़ भेजने का ऐलान किया था। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने खुद 8 बड़े टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से अमेरिका की तरफ़ आते देखा था। बाद में, ईरान ने किसी वजह से माफ़ी मांगकर 2 और जहाज़ जोड़े। कुल मिलाकर, 10 तेल टैंकर भेजे गए हैं। जियोपॉलिटिकल एनालिस्ट्स के मुताबिक, ऐसी घटना सच में बहुत कम होती है।

तेल के जहाज़ों पर पाकिस्तानी झंडा!

ट्रंप ने कहा, ‘टैंकरों पर पाकिस्तानी झंडे थे।’ अमेरिका भेजे गए ईरानी तेल टैंकर पर पाकिस्तानी झंडा क्यों है? जियोपॉलिटिकल एनालिस्ट के मुताबिक, टैंकर पर पाकिस्तानी झंडा लगाए जाने से यह साफ है कि इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच रिश्ते नॉर्मल करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

क्या पर्दे के पीछे कोई सीक्रेट डील हो रही है?

जियोपॉलिटिकल एनालिस्ट के मुताबिक, यह घटना इशारा करती है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे कोई बड़ी डील होने वाली है। और पाकिस्तान इसमें मीडिएटर की भूमिका निभा रहा है। इससे पहले, इस्लामाबाद ने ट्रंप का 15-पॉइंट सीज़फ़ायर प्रपोज़ल तेहरान को सौंपा था। हालांकि, ईरानी लीडरशिप ने उस प्रपोज़ल को रिजेक्ट कर दिया था।

ट्रंप ने ईरानी तेल की शिपमेंट को अमेरिका के लिए ‘बहुत बड़ा इनाम’ बताया। उन्होंने दावा किया कि वे ‘सही लोगों के साथ डील कर रहे हैं।’ ये लोग कौन हैं? पर्दे के पीछे क्या चल रहा है? ये वे सवाल हैं जो अब इंटरनेशनल रिलेशन में घूम रहे हैं।

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