अगले महीने, 1 अप्रैल से कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इन बदलावों का सबसे ज़्यादा असर आम आदमी पर पड़ेगा। अगले महीने से UPI से जुड़े कई बदलाव होने जा रहे हैं। इन बदलावों के बारे में जानना आपके लिए ज़रूरी है, क्योंकि आजकल UPI हर तरह के पेमेंट, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, के लिए ज़रूरी है।

UPI में क्या बदलेगा?

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने UPI पेमेंट में कुछ बदलाव करने का फ़ैसला किया है। इन बदलावों की वजह से, अब से UPI पेमेंट के लिए ज़्यादा सिक्योरिटी की ज़रूरत होगी। साथ ही, पेमेंट के लिए सिर्फ़ OTP काफ़ी नहीं होगा।

पेमेंट के लिए टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन

1 अप्रैल से पेमेंट के लिए टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ज़रूरी होगा।

सिर्फ़ OTP वेरिफ़िकेशन काफ़ी नहीं होगा।

‘टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन’ के लिए PIN, पासवर्ड और फ़िंगरप्रिंट की ज़रूरत होगी।

आसान शब्दों में कहें तो, पेमेंट के लिए सिर्फ़ OTP ही नहीं, बल्कि पासवर्ड या फ़िंगरप्रिंट की भी ज़रूरत होगी।

पेमेंट के लिए टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन क्यों शुरू किया गया था?

इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को पेमेंट से जुड़े फ्रॉड को कम करने और किसी को भी आसानी से फ्रॉड करने से रोकने के लिए बनाया गया है।

पेमेंट में लगेगा समय: टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन आने से अब पेमेंट प्रोसेस होने में ज़्यादा समय लगेगा और बड़े पेमेंट भी पूरे होने में ज़्यादा समय लगेगा।

फ्रॉड के लिए बैंक ज़िम्मेदार होंगे

रिज़र्व बैंक के नए नियमों के मुताबिक, अब से फ्रॉड के लिए बैंक ज़्यादा ज़िम्मेदार होंगे।

बैंकों और PhonePe, Paytm जैसे दूसरे पेमेंट प्लेटफॉर्म को सिक्योरिटी नियमों का पालन करना होगा।

टेक्निकल वजहों से होने वाले फ्रॉड के लिए बैंक ज़िम्मेदार होंगे।

ऐसे में यूज़र्स को जल्द से जल्द इसका सॉल्यूशन मिल जाएगा।

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