आयोग ने पोलिंग बूथ की संख्या बढ़ा दी है। शनिवार सुबह दिल्ली में चुनाव आयोग की ओर से जारी एक बयान में आयोग ने कहा कि वोटरों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य में 4660 और पोलिंग बूथ बनाए जा रहे हैं। पता चला है कि ये बूथ उन इलाकों में बनाए जाएंगे जहां वोटरों की संख्या 1200 से ज़्यादा है। वहीं, 321 पोलिंग बूथ की जगह भी बदली जा रही है। नए पोलिंग बूथ के साथ बंगाल में अब कुल पोलिंग बूथ की संख्या 85 हज़ार 379 हो गई है। इससे पहले 15 मार्च को बंगाल चुनाव की घोषणा के दिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि आयोग वोटिंग को त्योहार बनाने के लिए जो भी ज़रूरी होगा, वह करेगा। इनमें वोटरों को सुविधाएं देने के मुद्दे को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। आयोग का मानना ​​है कि बूथ उनके घरों के पास होने से वोटरों में वोटिंग के प्रति दिलचस्पी बढ़ेगी। हालांकि पिछले कुछ दशकों से बंगाल का वोटिंग रेट कुछ दूसरे राज्यों से ज़्यादा रहा है। इस बार आयोग इसे और बढ़ाना चाहता है। आयोग न सिर्फ घरों के पास बूथ बनाकर, बल्कि कई और तरीकों से भी वोटरों को बूथ तक लाने की कोशिश कर रहा है। बंगाल के साथ-साथ जिन चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में वोटिंग होनी है, वहां के चीफ इलेक्शन ऑफिसर्स ने भी वोटरों में जागरूकता बढ़ाने का काम किया है। राजनीतिक हलकों का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि आयोग ने इस बार बंगाल में बूथों की संख्या बढ़ाकर वोटरों को एक पॉजिटिव मैसेज दिया है। इसके अलावा, आयोग के अधिकारी अप्रैल के गर्म मौसम को भी ध्यान में रख रहे हैं। बूथ घरों के पास होने पर वोटरों को पोलिंग स्टेशन जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। बंगाल में पहले फेज की वोटिंग 23 अप्रैल को होगी। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, उससे 20 दिन पहले बूथों की संख्या बढ़ाने की एक और खास वजह है। वोटर लिस्ट में खास तौर पर गहन संशोधन के बाद 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की गई थी। इससे पता चलता है कि करीब 60 लाख नाम पेंडिंग हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा जानकारी में गड़बड़ी की वजह से लिस्टेड है। उस समय पता चला था कि वोटिंग के इस फेज में जिन लोगों के नाम लिस्ट में जुड़ जाएंगे, वे भी वोटिंग में हिस्सा ले सकेंगे। वह प्रोसेस अभी भी चल रहा है। कमीशन ने पिछले कुछ हफ्तों में आठ और लिस्ट भी जारी की हैं। इस वजह से, लिस्ट में कई नाम जुड़ गए हैं। हालांकि, अभी सही संख्या पता नहीं है। इस तरह से वोटर्स की संख्या बढ़ाना ही और पोलिंग बूथ बनाने की एक मुख्य वजह है।

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