चुनाव से पहले राज्य में लॉ एंड ऑर्डर और क्राइम कंट्रोल को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। इसी सिलसिले में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने ज़मीन घोटाले के मामले में ‘सोना पप्पू’ उर्फ ​​बिस्वजीत पोद्दार को तलब किया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें इसी हफ्ते साल्ट लेक के CGO कॉम्प्लेक्स में ED ऑफिस में पेश होने का आदेश दिया गया है। दूसरी तरफ, उनके इर्द-गिर्द एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगे हैं कि सोना पप्पू का नाम एक्टिव क्रिमिनल्स की लिस्ट में नहीं है। चुनाव आयोग ने इस गंभीर लापरवाही के आरोप में कस्बा पुलिस स्टेशन के OC को सस्पेंड कर दिया है। चुनाव से पहले आयोग ने राज्य और कोलकाता पुलिस को साफ तौर पर फरार और घोषित क्रिमिनल्स की लिस्ट बनाने का निर्देश दिया था। बताया जा रहा है कि उस निर्देश का ठीक से पालन न करने के आरोप में यह सख्त कार्रवाई की गई। चुनाव आयोग ने पहले कहा था कि सभी पुलिस स्टेशन फरार और कुख्यात क्रिमिनल्स की जल्दी पहचान करके लिस्ट तैयार करें। साथ ही, SDPOs को आरोपियों के खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट को तुरंत तामील करने की जिम्मेदारी दी गई थी। यह भी कहा गया कि ज़रूरत पड़ने पर लुकआउट सर्कुलर जारी किए जाएं। इसके अलावा, कई ज़िलों और महकुमा के बीच तालमेल रखकर जानकारी शेयर करने पर ज़ोर दिया गया। कमीशन के निर्देशों के मुताबिक, पुलिस थानों को हर विधानसभा इलाके में गड़बड़ी वाले इलाकों की पहचान करने को भी कहा गया। इसके साथ ही, पिछले चुनावों में क्रिमिनल एक्टिविटी में शामिल सभी बदमाशों और ‘गुंडों’ की पहचान करने को कहा गया। पुलिस प्रशासन को इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने को कहा गया। कुल 16 पॉइंट के निर्देश जारी करके चुनाव आयोग ने साफ़ कर दिया कि चुनाव से पहले सभी क्रिमिनल केस की जांच तेज़ी से पूरी की जाए। कोई भी नॉन-बेलेबल वारंट 10 दिन से ज़्यादा लटकाकर नहीं रखा जा सकता। फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के लिए स्पेशल ऑपरेशन चलाने का भी आदेश दिया गया। ऐसे में एक तरफ़ ED के समन से सोना पप्पू पर दबाव बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ़ पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि यह घटना इस बात का संकेत है कि चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग का सख्त रुख और मजबूत होता जा रहा है।

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