ईरान के खिलाफ अपने मिलिटरी कैंपेन में अमेरिका एक बड़ा कदम उठाने वाला है। देश अपनी एडवांस्ड JASSM-ER लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें तैनात कर रहा है। ये मिसाइलें असल में दूसरे इलाकों के लिए रिज़र्व थीं। मार्च के आखिर में इन्हें वापस बुलाने का ऑर्डर दिया गया था। मिसाइलें पैसिफिक इलाके से लाई जा रही हैं और अब इन्हें सेंट्रल कमांड बेस और ब्रिटेन के फेयरफोर्ड में स्टोर किया जा रहा है। जंग से पहले, अमेरिका के पास करीब 2,300 JASSM-ER थे। अब सिर्फ करीब 425 बची हैं। इनमें से करीब 75 इस्तेमाल करने लायक नहीं हैं। यह मिसाइल 600 मील से ज़्यादा दूरी तक मार कर सकती है। इसे दुश्मन के एयर डिफेंस से बचने के लिए सुरक्षित दूरी से हमला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कम दूरी की JASSM समेत कुल स्टॉक का करीब दो-तिहाई हिस्सा ईरान के जंग के लिए पहले ही दिया जा चुका है। अमेरिका फरवरी के आखिर से इज़राइल के साथ जॉइंट ऑपरेशन में लगा हुआ है। पता चला है कि चार हफ्तों में 1,000 से ज़्यादा JASSM-ER इस्तेमाल हो चुके हैं। ऐसे हथियारों के इस्तेमाल से सैनिकों के लिए खतरा कम हो जाता है। हालाँकि, इससे भविष्य के लिए रिज़र्व कम हो रहा है, खासकर चीन जैसे दुश्मनों के लिए।

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