विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। इस बार वोटिंग प्रक्रिया को फ्री और फेयर रखने के लिए पुलिस निगरानी को खास अहमियत दी जा रही है। इसी मकसद से IPS अधिकारी सर्वना विवेक एम को पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। आयोग की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि यह पुलिस ऑब्जर्वर चुनाव से पहले, चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद राज्य में पूरी कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नजर रखेगा। यह नियुक्ति भारत के संविधान के आर्टिकल 324 और रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के तहत की गई है। सूत्रों के मुताबिक, वह कोलकाता में चीफ इलेक्शन ऑफिसर के ऑफिस से काम करेंगे। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, IPS अधिकारी सर्वना विवेक एम ओडिशा कैडर के IPS अधिकारी हैं। वह चुनाव कानून-व्यवस्था बनाए रखने के काम की निगरानी करेंगे और इससे जुड़ी सभी रिपोर्ट सीधे आयोग को भेजेंगे। आयोग ने इस चुनाव के लिए पहले कभी नहीं की गई तैयारी की है। 23 और 29 अप्रैल – राज्य के 294 विधानसभा क्षेत्रों में दो फेज में वोटिंग होगी। हर सेंटर पर एक जनरल ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। खास बात यह है कि इस बार पहली बार ‘ऑब्जर्वर सेल’ बनाया गया है। इसका काम पूरे चुनाव प्रोसेस पर कड़ी नज़र रखना और किसी भी गड़बड़ी की तुरंत पहचान करना होगा। ज़्यादातर ऑब्जर्वर बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे अलग-अलग राज्यों से लाए गए हैं, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर मनोज अग्रवाल ने चुनावों को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर चुनाव के काम में जानबूझकर कोई लापरवाही या गड़बड़ी होती है, तो संविधान का आर्टिकल 311 लागू हो सकता है। बूथ की सुरक्षा की पूरी ज़िम्मेदारी सेंट्रल फोर्स पर होगी, लेकिन बूथ के अंदर व्यवस्था बनाए रखने की मुख्य ज़िम्मेदारी पोलिंग कर्मचारियों की होगी। निर्देश दिया गया है कि अगर स्टाम्प लगे वोट या EVM से छेड़छाड़ जैसे आरोप लगते हैं, तो तुरंत सेक्टर ऑफिसर को बताया जाए। यहां तक ​​कि पोलिंग कर्मचारियों की मौजूदगी के सबूत के तौर पर बूथ में उनकी तस्वीरें लेने का भी इंतज़ाम किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट को सख्ती से लागू करने समेत कई गाइडलाइंस भी जारी की हैं। सभी राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों को बराबर मौके देने, प्रशासन की निष्पक्ष भूमिका पक्का करने और सरकारी ताकत का गलत इस्तेमाल रोकने पर खास ध्यान देने को कहा गया है। कुल मिलाकर, इस साल के विधानसभा चुनावों के लिए आयोग की तैयारियां साफ संदेश दे रही हैं कि किसी भी तरह की गड़बड़ी या अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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