प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी देश को संबोधित करेंगे। पता चला है कि वे शनिवार रात 8:30 बजे देशवासियों को संबोधित करेंगे। कल केंद्र सरकार को महिला आरक्षण को लेकर लोकसभा में बड़ा झटका लगा था। लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें रिजर्व करने के लिए तीन बिल पास कराने की पहल की गई थी। लेकिन वोटिंग में BJP सरकार हार गई। फिर प्रधानमंत्री मोदी जी आज रात को संबोधित करेंगे।

पॉलिटिकल सर्कल के एक हिस्से के मुताबिक, वे महिला आरक्षण को लेकर कुछ ऐलान कर सकते हैं। महिला आरक्षण बिल 2023 में संसद में पास हुआ था। यह बिल बाद में कानून बन गया। इस कानून के मुताबिक, 2034 तक लोकसभा में 33 परसेंट सीटें महिलाओं के लिए रिज़र्व की जा सकती हैं। इस बीच, मोदी सरकार ने 2029 में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 परसेंट सीटें रिज़र्व करने की पहल की। ​​इसी मकसद से 16 अप्रैल को फिर से संसद का स्पेशल सेशन बुलाया गया। केंद्र की BJP सरकार महिला रिज़र्वेशन एक्ट के मुताबिक 33 परसेंट सीटों का रिज़र्वेशन पक्का करने के लिए लोकसभा में तीन बिल पास करना चाहती है। ये तीन बिल हैं कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट (131वां अमेंडमेंट) बिल, डिलिमिटेशन बिल और यूनियन टेरिटरीज़ डिलिमिटेशन बिल। केंद्र का कहना है कि लोकसभा में महिलाओं के लिए सीटें रिज़र्व करने के लिए, 2011 की आबादी के आधार पर पूरे देश में सीटों का रीएलोकेट या डिलिमिटेशन करना होगा। इसके लिए कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट (131वां अमेंडमेंट) बिल पास करना होगा। लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाएगी। कांग्रेस समेत विपक्ष का आरोप है कि महिला आरक्षण को ध्यान में रखकर BJP अपना बेस मजबूत करने की कोशिश कर रही है। उत्तर भारत की आबादी दक्षिण भारत से ज़्यादा है। इसलिए, अगर सीटों का री-एलोकेशन होता है, तो उत्तर में सीटें स्वाभाविक रूप से बहुत बढ़ जाएंगी और BJP का बेस मजबूत होगा। कांग्रेस, तृणमूल, समाजवादी पार्टी और ‘इंडिया’ कैंप का कहना है कि वे महिला आरक्षण को ध्यान में रखकर अगले लोकसभा चुनाव के लिए ठोस व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं। 16 अप्रैल से लंबी चर्चा के बाद, कल शाम लोकसभा में बिल पर वोटिंग हुई। बिल को पास करने के लिए लोकसभा के दो-तिहाई यानी 352 MPs के सपोर्ट की ज़रूरत थी। वोटिंग के दौरान संसद के निचले सदन में 528 MPs मौजूद थे। वोटिंग के बाद देखा गया कि 298 MPs ने बिल का सपोर्ट किया। 230 MPs ने बिल के खिलाफ वोट किया। ज़ाहिर है, प्रधानमंत्री मोदी के राज में यह पहली बार है कि सत्ताधारी गठबंधन कोई बिल पास नहीं करवा पाया। यह पहली बार है जब विपक्ष जीता है।

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