मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जानकारी दी है कि राज्यसभा के 73 विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा के महासचिव को नया नोटिस सौंपा है। इसमें राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि संविधान के प्रावधानों के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सिद्ध दुराचरणके आधार पर हटाया जाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, इस नए नोटिस में 15 मार्च 2026 के बाद किए गए कथित कृत्यों और चूकों के आधार पर नौ विशिष्ट आरोप शामिल किए गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का पद पर बने रहना संविधान की भावना के खिलाफ है और वे सरकार के इशारों पर काम कर रहे हैं। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब इससे पहले दिया गया नोटिस पहले ही खारिज किया जा चुका है। 12 मार्च को विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में प्रस्ताव का नोटिस दिया था। उस समय लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 सांसदों का समर्थन बताया गया था। लेकिन 6 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने इसे अस्वीकार कर दिया था। दोनों पीठासीन अधिकारियों ने अपने फैसले में कहा था कि नोटिस में मिसबिहेवियर साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और यह संवैधानिक मानकों पर खरा नहीं उतरता। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण के आरोप लगाए हैं। इनमें नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल, चुनावी गड़बड़ियों की जांच में बाधा, एसआईआर और उसके देशव्यापी विस्तार पर आपत्ति, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखने में विफलता जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, संख्या बल के लिहाज से विपक्ष की स्थिति कमजोर मानी जा रही है। नियमों के अनुसार, लोकसभा में ऐसे प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर और राज्यसभा में 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। इसके बाद नोटिस स्वीकार होने पर सदन में बहस और फिर मतदान होता है। वर्तमान परिस्थिति में राज्यसभा में 73 सांसदों का समर्थन तकनीकी रूप से आवश्यक सीमा से ऊपर है, लेकिन अंतिम फैसला नोटिस की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा। चूंकि पहले भी इसी तरह का प्रयास खारिज हो चुका है, इसलिए इस बार भी प्रक्रिया आसान नहीं मानी जा रही है।
