कर्नाटक के तुमकुर जिले में इस हफ्ते 35 मोरों की मौत हो गई है। माना जा रहा है कि इलाके में पड़ रही भीषण गर्मी और लू की स्थिति इसकी वजह हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, ये मौतें 500 मीटर से 1 किलोमीटर के दायरे में फैली हुई पाई गईं, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई एक जगह की घटना नहीं है, बल्कि इसका असर बड़े क्षेत्र में हुआ है। घटना के बाद पशु चिकित्सा टीमों ने मोरों के शवों का पोस्टमार्टम किया और जांच के लिए सैंपल लैब भेजे हैं। रिपोर्ट 48 घंटे में आने की उम्मीद है। वन अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में पाया गया है कि पक्षियों के शरीर और पंख सामान्य थे, लेकिन फेफड़ों में असर दिखा है। फिलहाल लू और डिहाइड्रेशन को मुख्य कारण माना जा रहा है, लेकिन बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। बोम्मनहल्ली, कोलिहल्ली, बायरासंद्रा और हुल्लेनहल्ली सहित कई गांवों में शव मिले हैं। पर्यावरणीय तनाव को सबसे प्रमुख कारण माना जा रहा है, लेकिन अधिकारियों ने अन्य संभावित कारणों को खारिज करने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने ज़हर देने की संभावना से इनकार कर दिया है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार वे बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों की संभावना की जांच कर रहे हैं। संदूषण की जांच के लिए आसपास के जल निकायों, विशेष रूप से पत्थर की खदानों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को ग्रहण करने वाले जल स्रोतों से भी नमूने एकत्र किए गए हैं। इन्हें फोरेंसिक विश्लेषण के लिए बेंगलुरु की एक प्रयोगशाला में भेजा गया है।
