पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शिक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और युगांतरकारी बदलाव होने जा रहा है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनते ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। सोमवार को कोलकाता के धनधान्य ऑडिटोरियम में राज्य सरकार द्वारा आयोजित माध्यमिक और उच्च माध्यमिक (बोर्ड परीक्षाओं) के मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह ऐतिहासिक एलान किया। मुख्यमंत्री ने जहां एक तरफ राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था का कायाकल्प करने का ब्लूप्रिंट सामने रखा, वहीं दूसरी तरफ निजी (प्राइवेट) शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर कड़ा संदेश भी दिया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर केंद्र सरकार के साथ हुए समझौते के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब बंगाल में भी ‘पीएम श्री विद्यालय’ योजना की शुरुआत की जा रही है। इस योजना के तहत राज्य के प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक सरकारी स्कूल को आधुनिक मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाना ही इस नीति का मूल उद्देश्य है। इसी कड़ी में बंगाल के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के पाठ्यक्रम (सिलेबस) में बदलाव करने के साथ-साथ स्मार्ट क्लासरूम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू की जा रही हैं। सरकार का विशेष जोर कोलकाता के साथ-साथ जिलों और दूर-दराज के सीमांत क्षेत्रों के स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने पर है। शिक्षा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह रसातल में चली गई थी। शिक्षक भर्ती घोटाले (Teacher Recruitment Scam) के कारण हजारों योग्य छात्र प्रभावित हुए, कई स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गए और स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या लगातार घटती चली गई। लंबे समय से स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नई नियुक्तियां भी नहीं हुई थीं। सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार पारदर्शी तरीके से नई नियुक्तियां शुरू कर और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर बंगाल की खोई हुई मेधा और साख को वापस लौटाएगी। मेधावी छात्रों के मंच से मुख्यमंत्री ने राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह खुले निजी शिक्षण संस्थानों को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी। टीएमसी शासनकाल के दौरान निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने और पैसों के बदले सर्टिफिकेट बांटने जैसी कई गंभीर शिकायतें सामने आती रही हैं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “निजी शिक्षण संस्थान अब अनैतिक रूप से फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे। छात्रों के शैक्षणिक विकास और स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सरकार की कड़ी नजरदारी (मॉनिटरिंग) रहेगी।” जानकारों का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लागू होने और इस नए समझौते से बंगाल की सुस्त पड़ी शिक्षा व्यवस्था को एक नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी।

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