पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार, 20 मई 2026 से राज्य में नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA लागू करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी जी ने घोषणा की कि CAA के तहत अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को तत्काल डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछली सरकार ने CAA का विरोध किया था और केंद्र के जरूरी प्रावधानों को लागू नहीं किया। हमने आज 20 मई से इस कानून को लागू कर दिया है। उन्होंने बताया कि CAA के अनुसार 7 समुदायों या धर्मों के लोगों को नागरिकता मिलेगी। जो लोग इसके दायरे में नहीं आएंगे उन्हें राज्य की पुलिस गिरफ्तार करेगी। इसके बाद उन्हें बीएसएफ के हवाले किया जाएगा और बीएसएफ उन्हें वापस भेजने की व्यवस्था करेगी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस दौरान यह भी कहा कि यह कदम ‘पता लगाओ, हटाओ, वापस भेजो’ यानी Detect, Delete, Deportation फ्रेमवर्क का हिस्सा है। CAA के दायरे में आने वाले समुदाय नई व्यवस्था से बाहर रहेंगे। जबकि घुसपैठियों के तौर पर पहचाने गए लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी। राज्य सचिवालय नबन्ना में सीएम सुवेंदु ने कहा कि पिछले साल 14 मई को केंद्र सरकार ने राज्य को पत्र भेजा था। इसमें घुसपैठियों को सीधे बीएसएफ के हवाले करने की बात कही गई थी। लेकिन पिछली सरकार इस अहम प्रावधान को लागू करने में नाकाम रही। अब हमने इसे लागू कर दिया है। सुवेंदु अधिकारी ने शरणार्थियों को कानूनी सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के बीच फर्क समझाया। उन्होंने कहा कि CAA के तहत हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय शामिल हैं। ये वे लोग हैं जो 31 दिसंबर, 2024 तक बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हैं। ऐसे लोगों को पुलिस हिरासत में नहीं ले सकती। दरअसल मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ किया कि जो लोग इस कानून के तहत नहीं आते उन्हें घुसपैठिया माना जाएगा। इसके बाद बीएसएफ, बीजीबी से बात करेगी और उन्हें वापस भेजने के लिए जरूरी कदम उठाएगी। यह कानून आज से लागू किया जा रहा है। सीएम अधिकारी ने बताया कि राज्य के बड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को पहले ही निर्देश दे दिए गए हैं। डीजीपी और गृह सचिव को बता दिया गया है कि पश्चिम बंगाल और देश की सुरक्षा के लिए सीमावर्ती इलाकों के सभी पुलिस थानों में यह कानून लागू होगा। गौरतलब है कि बीजेपी की बंगाल की राजनीति में बॉर्डर मैनेजमेंट और घुसपैठ का मुद्दा हमेशा अहम रहा है। इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल को जमीन सौंपना भी शुरू कर दिया है।

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