तालाबों को भरकर गैर-कानूनी तरीके से घर बनाने की जांच के आदेश दिए गए हैं। अगर ज़रूरी हुआ तो अरूप रॉय को छूट नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की गैर-कानूनी घुसपैठ के लिए ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ है। गुरुवार को हावड़ा के नए कलेक्ट्रेट में खड़े होकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने RPF अधिकारियों को यह आदेश देते हुए कहा, “अगर कोई गैर-कानूनी घुसपैठिया पकड़ा जाए तो कोर्ट न जाएं, बल्कि सीधे बॉर्डर पार करें।” उन्हें सीधे पेट्रापोल-बनगांव बॉर्डर से वापस भेजने की बात करके उन्होंने बताया कि उनकी सरकार अपनी बॉर्डर पॉलिसी में कितनी सख्त होने वाली है। एडमिनिस्ट्रेटिव मीटिंग के मंच से मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि इस साल के आखिर तक हावड़ा और बाली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव करा दिए जाएंगे। बाकी बचे उपचुनाव भी उसी समय होंगे। हालांकि, चुनाव से पहले बाली-हावड़ा बॉर्डर तय करने का काम पूरा करना होगा। लंबे समय से लटका यह बॉर्डर का मामला ही चुनाव टालने का बहाना था। अब नई सरकार उस मामले को सुलझाने की कोशिश कर रही है। शुभेंदु हावड़ा की मुश्किल समस्याओं की जड़ तक पहुंचने के लिए रेलवे को साथ ले रहे हैं। ईस्टर्न और साउथ ईस्टर्न रेलवे के जनरल मैनेजरों के साथ एक मीटिंग हुई। रेलवे और राज्य मिलकर सभी समस्याओं – स्टेशन परिसर में पानी और ड्रेनेज, ट्रैफिक जाम, अवैध कब्ज़ा – को सुलझाएंगे। पिछली सरकार में शहर रेलवे और नगर पालिका के बीच कोल्ड वॉर से जूझ रहा था। मुख्यमंत्री उस तस्वीर को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। मीटिंग में घुसपैठ का मुद्दा बार-बार उठा। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि हावड़ा स्टेशन के आसपास अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने कानूनी लड़ाई में समय बर्बाद किए बिना उन्हें तुरंत निकालने का आदेश दिया है। प्रशासन के एक हिस्से के मुताबिक, सत्ताधारी खेमा चुनाव से पहले बॉर्डर और पहचान की राजनीति को सामने लाने की कोशिश कर रहा है। एनालिस्ट का कहना है कि BJP ने हावड़ा-बाली उपचुनाव को एक बर्ड आई व्यू बना दिया है। एक तरफ, सीमाओं के सीमांकन और जल्दी वोटिंग की घोषणा एडमिनिस्ट्रेटिव एक्टिविटी का संदेश है, तो दूसरी तरफ, अवैध घुसपैठ पर सख्त रुख। वोटिंग का मैदान गरमाने की दोनों की स्ट्रैटेजी साफ है। मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को हावड़ा के नए कलेक्ट्रेट में एक एडमिनिस्ट्रेटिव मीटिंग में करप्शन के खिलाफ जंग का ऐलान किया। उनके निशाने पर सिर्फ ब्यूरोक्रेट्स ही नहीं बल्कि पुरानी रूलिंग पार्टी के राघव बोवल भी हैं। उन्होंने कहा, “सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल हुआ है? इसे रिकवर करके ट्रेजरी में वापस करना होगा।” मीटिंग का सबसे धमाकेदार हिस्सा पूर्व मंत्री अरूप रॉय को लेकर था। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि अगर उनके खिलाफ पक्के सबूत मिलते हैं तो सरकार लीगल एक्शन लेने से नहीं हिचकिचाएगी। कभी ताकतवर रहे मंत्री के खिलाफ पब्लिक प्लेटफॉर्म से दिए गए इस मैसेज ने हावड़ा की पॉलिटिक्स में नई लहर पैदा कर दी है। कई लोगों के मुताबिक, यह पुरानी सरकार को जवाबदेह ठहराने की शुरुआत है। शुवेंदु ने शहर में हुए गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन पर भी कड़ा रुख अपनाया। हावड़ा पुर इलाके में तालाबों को भरकर घर बनाए गए हैं, और नियमों को तोड़कर मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग्स बनाई गई हैं। मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि हर गैर-कानूनी स्ट्रक्चर की जांच की जाएगी। पानी की जगहों को भरकर बनाए गए घरों पर एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने यह संदेश दिया कि पर्यावरण और शहरी नियोजन पर उंगली उठाने के दिन अब खत्म हो गए हैं।

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