केंद्र सरकार ने नेचुरल गैस की सप्लाई पर लगाए गए इमरजेंसी कंट्रोल वापस ले लिए हैं. सरकार ने इसी साल मार्च महीने में सरकार ने ये प्रावधान जारी किए थे, जिनके तहत सरकार प्राकृतिक गैस के आवंटन और सप्लाई पर सीधा नियंत्रण रख रही थी. उस समय सरकार को यह अधिकार दिया गया था कि जरूरत पड़ने पर वह यह तय कर सके कि किस सेक्टर को कितनी प्राकृतिक गैस मिलेगी क्योंकि उद्देश्य गैस की संभावित कमी के दौरान उर्वरक, CNG-PNG, बिजली उत्पादन और अन्य आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देना था. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अगर गैस की कमी होती है, तब भी आम लोगों और आवश्यक सेवाओं पर इसका न्यूनतम असर पड़े. सरकार का कहना है कि मौजूदा समय में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और आपूर्ति की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर है. घरेलू उत्पादन, आयात और वितरण व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही है तथा तत्काल किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है. ऐसे में इमरजेंसी कंट्रोल बनाए रखने की जरूरत नहीं रह गई थी. इसी कारण इन विशेष प्रावधानों को वापस लेने का फैसला लिया गया है. अब प्राकृतिक गैस की सप्लाई और वितरण फिर से सामान्य व्यवस्था के तहत होगा और इमरजेंसी नियंत्रण लागू नहीं रहेगा. अमेरिका और ईरान युद्ध के बाद होर्मुज संकट पैदा हुआ था, जिसकी वजह से दुनियाभर में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की कमी हो गई. जिसकी वजह से सरकार ने इस पर इमरजेंसी कंट्रोल लगाया था. अब अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का समझौता हुआ है, जिसके बाद वे अब फाइनल बातचीत में हैं. अब देखना होगा कि दोनों पक्ष कितने दिनों में आम सहमति पर पहुंच सकते हैं.
