अगस्त 2024 में कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कालेज व अस्पताल में एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले में ड्यूटी में लापरवाही के आरोपि तीन वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों के निलंबन की अवधि सोमवार को 120 दिन और बढ़ा दी गई। बंगाल के मुख्यमंत्री ने 15 मई को इस मामले में तीन आरोपित आइपीएस अधिकारियों, कोलकाता पुलिस के तत्कालीन आयुक्त विनीत कुमार गोयल, तत्कालीन उपायुक्त (उत्तर) अभिषेक गुप्ता और शहर की पुलिस की तत्कालीन उपायुक्त (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी को निलंबित करने और उन तीनों के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश दिया। अब, सोमवार को उनके सस्पेंशन की अवधि 120 दिन और बढ़ा दी गई है। राज्य सचिवालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, आइपीएस अधिकारियों के खिलाफ सही और बिना किसी प्रभाव वाली विभागीय जांच सुनिश्चित करने के लिए निलंबन की अवधि बढ़ाई गई है। डाक्टर के साथ हुए भयानक दुष्कर्म और हत्या केस की नए सिरे से जांच के लिए सीबीआइ ने पहले ही एक नया विशेष जांच दल (एसआइटी) बनाया है। नई एसआइटी के सदस्यों ने पिछले महीने गुप्ता और मुखर्जी से पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। नौ अगस्त 2024 की सुबह आरजी कर अस्पताल परिसर से महिला डाक्टर का शव मिलने के बाद, पूरे राज्य में मेडिकल जगत और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों, मशहूर हस्तियों और आम लोगों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। धीरे-धीरे, विरोध प्रदर्शन की गूंज बंगाल से होते हुए दूसरे राज्यों तक फैल गई। जांच को ठीक से न संभालने के लिए गोयल और गुप्ता के तुरंत इस्तीफे की मांग की गई। उस समय, मुखर्जी ने मीडिया से बात की थी और उन पर अपनी प्रेस कांफ्रेंस के जरिए गुमराह करने वाली जानकारी देने का आरोप लगा था। आखिरकार, जनता के भारी दबाव के कारण ममता बनर्जी ने गोयल और गुप्ता का तबादला कर दिया, लेकिन मुखर्जी को उपायुक्त (सेंट्रल) के पद पर बनाए रखा। बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नौ मई पदभार संभालने के कुछ दिनों बाद ही उन्होंने आरजी कर मामले की फाइलें फिर से खोलने, तीन आइपीएस अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की घोषणा की थी।

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