कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की जिम्मेदारी ISKCON को देने के प्रस्ताव पर विवाद गहरा गया है। मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान राज्य के एडवोकेट जनरल सुरजीत नाथ मित्र ने अदालत को बताया कि फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और सरकार ने अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है। सरकार का कहना है कि इस मुद्दे पर समय से पहले याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि यदि मिड-डे मील की जिम्मेदारी ISKCON को दी जाती है, तो वर्तमान में भोजन तैयार करने वाले स्वयं सहायता समूहों की आजीविका प्रभावित होगी। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस बदलाव से लाखों महिलाओं के रोजगार पर संकट खड़ा हो सकता है। खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि यदि भविष्य में इस संबंध में अधिसूचना जारी होती है और बड़ी संख्या में महिलाओं का रोजगार समाप्त हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। अदालत ने कहा कि सरकार को अपने रुख को स्पष्ट करना होगा। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि विद्यार्थियों को मिड-डे मील में अंडा और मछली के स्थान पर पनीर और राजमा देने की योजना क्यों बनाई जा रही है। इस बदलाव को लेकर भी अदालत में आपत्ति दर्ज कराई गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है। अब सभी की नजर सरकार के आधिकारिक जवाब पर टिकी है।
